बिहार में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के बीच सीमावर्ती जिलों से अवैध शराब की तस्करी लगातार हो रही है. साहिबगंज में भी यह धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा. सकरी गली, मिर्जाचौकी, करमटोला जैसे छोटे स्टेशन तस्करों के लिए स्टॉक और ट्रांसपोर्ट सेंटर बन चुके हैं. स्थानीय रेलवे ट्रेनों के बैटरी बॉक्स तक को तस्करों ने सुरक्षित ठिकाने में बदल लिया है और लाखों रुपये कीमत की शराब ट्रेन के माध्यम से भेजी जा रही है. बिहार में नवंबर माह में होने वाले चुनाव को देखते हुए अभी से ही लोग शराब का स्टॉक करने में लग गये हैं. प्रतिदिन साहिबगंज-जमालपुर पैंसेजर ट्रेन, गया पैंसेजर ट्रेन, सुपर हावड़ा-गया एक्सप्रेस से शराब ले जाते हैं. पकड़े जाने पर कार्रवाई होती है. दो माह पहले जीआरपी साहिबगंज ने बड़ी कार्रवाई कर यह खुलासा किया था कि लोकल ट्रेन के बैटरी बॉक्स खोलकर बड़े पैमाने पर शराब की तस्करी की जा रही है. तब कई खेप बरामद कर पुलिस ने मामला दर्ज किया, किन्तु उसके बावजूद अवैध कारोबार जारी है और तस्करी के नए-नए रास्ते खड़े हो रहे हैं. रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और अवैध माल भेजना दोनों ही गंभीर अपराध हैं, जिन्हें रोकना पुलिस और रेलवे प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए. वहीं आरपीएफ की टीम लगातार ऐसे अवैध कारोबार पर अपना नजर बनाए रखती है और इसी कारण से आरपीएफ की टीम बरहरवा से लेकर साहिबगंज तक अवैध कारोबारी को ना सिर्फ जेल भेजा है बल्कि बड़े पैमाने पर शराब को भी पकड़ कर मद्य निषेध विभाग को सौंपा है. जीआरपी थाना प्रभारी धनंजय कुमार ने बताया कि अवैध शराब के खिलाफ लगातार छापामारी अभियान चलाए जा रहे हैं और पकड़े गए लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है. वहीं आरपीएफ के पुलिस निरीक्षक गुलाम सरवर ने कहा कि उनके पदस्थापन के बाद से बड़ी मात्रा में छापेमारी कर शराब बरामद की गयी है और तस्करों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं.
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