राजमहल/मंगलहाट. राजमहल प्रखंड मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर मंगलहाट स्थित दुर्गा स्थान मंदिर में पिछले 50 वर्षों से सार्वजनिक रूप से मां दुर्गा की भव्य पूजा होती आ रही है. इस बार भी अष्टमी और नवमी के संयोग पर वैदिक मंत्रोच्चारण व विधिविधान के बीच कोहड़ा और ईख की बलि दी गयी. सुबह से शाम तक हजारों श्रद्धालु दर्शन व पूजा-अर्चना में शामिल हुए. समिति ने द्वादशी तक विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं. विजयादशमी पर रावण वध और एकादशी को बाहिंच मेला विशेष आकर्षण रहता है, जिसमें नौका दौड़, पारंपरिक आदिवासी नृत्य, संताली नृत्य, बिषहरी गान, आतिशबाजी और मनोरंजन कार्यक्रम शामिल हैं. इस मेले में साहिबगंज, बरहरवा, राजमहल, तीनपहाड़ सहित बिहार और बंगाल से लाखों श्रद्धालु जुटते हैं. मनोरंजन हेतु तारामची, डांस, झूले व वॉटर स्विमिंग जैसी व्यवस्थाएं भी की गयी हैं. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समिति ने 200 वॉलेंटियर तैनात किए हैं और सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, जबकि प्रशासन की ओर से महिला व पुरुष पुलिस बल की भी तैनाती की गयी है. वहीं, राजमहल से 15-17 किलोमीटर दूर सरकंडा और सुकसेना गांवों के दुर्गा स्थान पर भी वर्षों से पूजा होती आ रही है. यहां मां “जमनी” या “जवनी” के नाम से प्रसिद्ध देवी को नवमी पर पाठा बलि दी जाती है.
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