जनजातीय क्षेत्रों में जागरुकता की कमी परीक्षा परिणाम को कर रहा प्रभावित : डीइओ

शिक्षा से जोड़ने की कवायद पर दिया गया जोर

साहिबगंज. जनजातीय क्षेत्रों में जागरुकता की कमी के कारण इसका सीधा असर शिक्षा पर पड़ता है. विशेष कर पहाड़िया समाज के बच्चे उच्चतर शिक्षा प्राप्ति से पूर्व ही विभिन्न रोजगार को महत्व देने लगते हैं. उपरोक्त बातें जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार हर्ष ने उत्क्रमित उच्च विद्यालय पहाड़पुर के आकलन के बाद कही. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि पहाड़पुर पूरी तरह आदिम जनजाति क्षेत्र है. झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा जनजातीय क्षेत्रों को शिक्षा से जोड़ने की कवायद को लेकर पहाड़पुर के विद्यालय को उत्क्रमित करते हुए उच्च विद्यालय बनाया गया. परंतु पहाड़िया समाज शिक्षा से ज्यादा ऑर्थोपार्जन को महत्व दे रहा है. ऐसे में इस आदिम जनजाति समाज में जागरूकता के बिना शिक्षा के महत्व को नहीं समझाया जा सकता. उन्होंने बताया कि उत्क्रमित उच्च विद्यालय पहाड़पुर में वर्ग दशम में केवल चार छात्र नामांकित थे. नामांकित चार छात्रों में से भी केवल एक छात्र ने ही परीक्षा के लिए आवेदन किया था. दुर्भाग्यवश से वह छात्र भी सफल नहीं हो सका और उसे विद्यालय का परिणाम 100% असफल की श्रेणी में चला गया. कुमार हर्ष ने बताया कि राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग का उद्देश्य राज्य में बेहतर परिणाम प्राप्त करने की दिशा में सुधार लाने का प्रयास करना है. इसी कड़ी के तहत जिले के मैट्रिक परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों का आकलन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि विभिन्न विद्यालयों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर जिला स्तर पर भी इस पर विचार किया जाएगा कि जिले में परिणाम प्रतिशत को बढ़ाने के लिए कौन-कौन से प्रयास किये जायें. बताते चलें कि स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के निर्देशानुसार जिला शिक्षा पदाधिकारी को जिले के सूचीबद्ध किये गये 59 विद्यालयों में से 15 विद्यालयों का आकलन करना है, जिसके तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा उत्क्रमित उच्च विद्यालय पहाड़पुर तथा भगैया के विद्यालय का आकलन किया गया.

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