साहिबगंज
चांदनी रात में रखी जाती खीर, हो जाती है औषधीय गुण से पूर्ण :
शरद पूर्णिमा की रात आसमान से अमृत की बरसात होती है. मान्यता है कि इस दिन खीर बनाकर उसे खुले आकाश में चन्द्रमा की रोशनी में रखने से उसमें अमृत समान गुण आ जाता है. उस खीर का सेवन दूसरे दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर करने से सभी को कई प्रकार का स्वास्थ्यप्रद लाभ मिलता है. चांदनी में रखी खीर में कई औषधीय गुण उत्पन्न हो जाते हैं. इसका सेवन करने से सांस की बीमारी सहित अन्य प्रकार के रोगों में काफी लाभ मिलता है. इस कारण शरद पूर्णिमा की रात कई लोग खीर बना कर खुले आकाश के नीचे चांद की रोशनी में रखते हैं और फिर उसका सेवन करते हैं.शरद पूर्णिमा पर खासकर बंगाली समाज के प्रत्येक घर में लखी पूजा का आयोजन भक्तिभाव से किया जाता है. इसे लेकर कई घरों में माता लखी की प्रतिमा भी स्थापित होती है. इसके बाद माता की विधि-विधान से पूजा होती है. माता लक्खी पूजा में कई प्रकार की प्राकृतिक सामग्री की जरूरत होती है. मसलन, धान की बाली, ईख, ताड़ के फल से निकलने वाला खूजा, नारियल आदि विशेष महत्वपूर्ण होता है. इसके अलावा भी कई अन्य सामग्री का पूजन में उपयोग होता है. बंगाली समाज के अलावा कुछ अन्य समाज भी लखी पूजा करते हैं.
कल दोपहर 12.23 बजे प्रवेश करेगी पूर्णिमा :
इस साल शरद पूर्णिमा उत्सव छह अक्टूबर को मनेगा. इसी दिन देर शाम को माता लक्खी की पूजा होगी. बंगाली पुरोहितों के अलावा कई अन्य पुरोहितों के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा यानि आश्विन पूर्णिमा छह अक्टूबर की दोपहर 12.23 बजे प्रवेश कर दूसरे दिन सात अक्टूबर की सुबह 09.16 बजे तक रहेगा. इस कारण शरद पूर्णिमा छह अक्टूबर को मनेगा. इसी दिन देर शाम को मां लक्खी (लक्ष्मी) की पूजा-अर्चना होगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
