साहिबगंज. शरद ऋतु के आगमन के साथ ही मसकलैया झील इन दिनों प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है, लेकिन इस प्राकृतिक सुंदरता के बीच पर्यावरण को लेकर गंभीर चेतावनी भी सामने आई है. मंदार नेचर क्लब के संस्थापक व बर्ड गाइड अरविंद मिश्रा ने मसकलैया झील व मोती झरना क्षेत्र का निरीक्षण किया. कहा कि यदि प्रदूषण पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले वर्षों में प्रवासी पक्षी इन स्थलों से दूरी बना सकते हैं. उन्होंने बताया कि मसकलैया झील हर वर्ष हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले पक्षियों का प्रमुख पड़ाव बनती है. पिछले वर्ष यहां सर्वे के दौरान 13 प्रजातियों के 78 प्रवासी पक्षियों दर्ज किये गये थे, लेकिन इस वर्ष 28 प्रजातियों के करीब 250 से 300 की संख्या में प्रवासी पक्षी आये हैं. वर्तमान में झील में रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड (लाल सिर), कॉमन कूट, पर्पल हेरोन, लेसर एडजुटेंट, एशियाई ओपनबिल (घोंघिल) सहित कई प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं. हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती ठंड के कारण पक्षी अनुकूल वातावरण की तलाश में झारखंड के जलाशयों की ओर रुख करते हैं. मसकलैया झील उनके लिए सुरक्षित विश्राम स्थल बन रही है. निरीक्षण के दौरान अरविंद मिश्रा मोती झरना भी पहुंचे, जहां कॉमन बजर्ड और ओरिएंटल हनी बजर्ड जैसे महत्वपूर्ण पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की. इन पक्षियों की तस्वीरें भी उन्होंने कैमरे में कैद की, जो क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है. अरविंद मिश्रा ने कहा कि झीलों और प्राकृतिक स्थलों के आसपास बढ़ते प्लास्टिक का कचरा, जल प्रदूषण और मानवीय हस्तक्षेप पक्षियों के लिए खतरा बन रहा है. प्रवासी पक्षी वहीं आते हैं, जहां उन्हें स्वच्छ जल, शांत वातावरण और सुरक्षित आवास मिलता है. अगर प्रदूषण और अवैध शिकार पर रोक नहीं लगी तो यह प्राकृतिक धरोहर प्रभावित होगी कि उन्होंने चेतावनी दी. उन्होंने यह भी बताया कि उधवा झील पक्षी अभयारण्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए वे वर्ष 1990 से प्रयासरत रहे. लगातार जागरूकता, सर्वे और संरक्षण संबंधी पहल के बाद वर्ष 2025 में उधवा झील को रामसर साइट घोषित किया गया, जो पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है. अरविंद मिश्रा ने इस उपलब्धि के लिए प्रभात खबर का आभार जताया. उन्होंने कहा कि अखबार ने समय-समय पर उनके प्रयासों और पक्षी संरक्षण से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिससे जागरुकता बढ़ी, और यह अभियान मजबूत हुआ. उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रभात खबर का पहल सराहनीय है. उन्होंने प्रशासन और स्थानीय लोगों से अपील की कि मसकलैया झील, मोती झरना और उधवा झील को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पक्षियों के संरक्षित आवास के रूप में देखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक धरोहर का आनंद ले सकें.
प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है मसकलैया झील, 28 प्रजातियों के 300 पक्षी आये
प्रदूषण बढ़ा तो प्रवासी पक्षी छोड़ देंगे मसकलैया झील व मोती झरना : अरविंद मिश्रा
