प्रतिनिधि, मंगलहाट: गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से राजमहल प्रखंड की महाराजपुर गदाई दियारा पंचायत के 14 टोले बाढ़ की चपेट में हैं. पिछले 8-10 दिनों से लगातार बढ़े जलस्तर के कारण करीब 600 परिवार प्रभावित हैं. कई घरों में 5 से 8 फीट तक पानी घुस गया है.
बाढ़ के कारण ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गयी है. लोगों के सामने सुरक्षित आवागमन के साथ भोजन और मवेशियों के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो गया है.
घरों में घुसा पानी, छत और चौकी पर रहने को मजबूर परिवार
बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गये हैं. जिन परिवारों ने घर नहीं छोड़ा है, वे बच्चों के साथ छत, नाव, बांस के मचान और चौकी पर रहने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों के अनुसार, पानी बढ़ने के कारण पशुओं के लिए चरने की व्यवस्था भी खत्म हो गयी है. इससे मवेशियों को बचाये रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है.
नाव नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
बाढ़ प्रभावित वार्ड सदस्य ललन महतो, उप मुखिया विश्वनाथ महतो समेत अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन पर पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं करने का आरोप लगाया है.
ग्रामीणों का कहना है कि नाविकों का पिछले दो वर्षों का बकाया भुगतान नहीं हुआ है. इसी कारण नाविक नाव चलाने से इनकार कर रहे हैं. बाढ़ के बीच नाव की कमी ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है.
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अब तक विधायक और सांसद बाढ़ प्रभावित परिवारों का हाल जानने के लिए इलाके में नहीं पहुंचे हैं.
निजी खर्च से 600 परिवारों तक पहुंची राहत
बुधवार को जिप सदस्य सुष्मिता देवी के पति सह भाजपा नमामि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक राजेश मंडल ने टीम के साथ गदाई दियारा पंचायत के सभी 14 टोलों का दौरा किया.
इस दौरान उन्होंने अपने निजी खर्च से करीब 600 बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच चूड़ा, गुड़, बिस्किट, चावल, दाल और अन्य राहत सामग्री वितरित की.
राजेश मंडल ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली और प्रशासन से प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत बतायी.
तीन हजार बीघा फसल बर्बाद होने का दावा
बाढ़ ने ग्रामीणों की खेती को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. ग्रामीणों के अनुसार दियारा क्षेत्र में करीब तीन हजार बीघा में लगी फसल पानी में डूब गयी है.
मूली, बैंगन, टमाटर, धान, पटवा समेत अन्य फसलें बर्बाद होने की बात कही गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि इन फसलों से एक-दो महीने बाद दो करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की उम्मीद थी.
फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट भी गहरा गया है.
प्रशासन से नाव और राहत की मांग
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पर्याप्त नाव उपलब्ध कराने, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी राहत पहुंचाने की मांग की है.
ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नाव के बिना प्रभावित टोलों में लोगों तक राहत पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक निकालना मुश्किल होगा.
मौके पर बिंदेश्वरी यादव, श्रवण मंडल, संजय मंडल, वार्ड सदस्य सुदाम मंडल, रुदल चौधरी, ललन महतो, चंदन चौधरी, निहार मंडल और दिवाकर मंडल समेत अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.
