प्रतिनिधि ,राजमहल.राजमहल प्रखंड के गदाई दियारा क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का प्रकोप लगातार गहराता जा रहा है. निचले इलाकों और खेतों में पानी भर जाने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिसका सबसे गंभीर असर स्थानीय पशुपालकों पर पड़ रहा है.
चारे के संकट से बढ़ी पशुपालकों की परेशानी
बाढ़ के कारण खेतों में पानी फैल जाने से मवेशियों के लिए हरी घास और चारे का संकट खड़ा हो गया है. स्थिति यह है कि पशुपालकों को अपनी जेब से अधिक पैसे खर्च कर बाहर से चारा मंगवाना पड़ रहा है, जिससे उनपर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में वृद्धि का यह सिलसिला जारी रहा, तो स्थिति और भी विकराल हो सकती है.
प्रशासनिक टीम ने लिया जायजा, बांटे गए चारे
हालात की गंभीरता को देखते हुए अंचल निरीक्षक प्रवीण कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम ने गदाई दियारा, रामबचन टोला और सिल्लू टोला समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. टीम ने मौके पर पहुंचकर पशुपालकों से बातचीत की और चारे की उपलब्धता का जायजा लिया. प्रशासन की ओर से जरूरत मंद पशुपालकों के बीच पशुधन के लिए चारे की व्यवस्था भी कराई गई.
इस दौरान मुखिया प्रतिनिधि संजय मंडल और वार्ड सदस्य सुदाम मंडल भी मौजूद रहे. जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को क्षेत्र की जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री और चारा उपलब्ध कराने की मांग की.
प्रशासन की पैनी नजर, जल्द होगी और सहायता
अंचल निरीक्षक प्रवीण कुमार ने आश्वासन दिया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति पर प्रशासन की पूरी नजर है. उन्होंने कहा कि पशुओं के चारे की आवश्यकता से जुड़े रिपोर्ट को वरीय अधिकारियों को भेजा जा रहा है, ताकि जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर चारा और अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके.
