साहिबगंज: गंगा के बढ़ते जलस्तर ने अब साहिबगंज के शहरी इलाकों में भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. दियारा क्षेत्र के बाद शहर के कई मोहल्ले भी बाढ़ की चपेट में आ गये हैं. अलीनगर, हबीबपुर, भारतीय कॉलोनी, हरिपुर और रसुलपुर दहला समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है.
पानी घरों तक पहुंचने के कारण लोगों की सामान्य जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गयी है. कई परिवारों के सामने घर में रहने या सुरक्षित स्थान पर जाने का संकट खड़ा हो गया है.
घरों के ग्राउंड फ्लोर और रसोई में घुसा पानी
शहरी इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने से कई घरों के ग्राउंड फ्लोर और रसोईघर में पानी भर गया है. इससे लोगों के लिए खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है.
कुछ परिवार मजबूरी में घर की ऊपरी मंजिल और छत पर रह रहे हैं. वहीं कई परिवार घर में ताला लगाकर रिश्तेदारों के यहां या किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर चले गये हैं.
बाढ़ ने सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए बढ़ा दी है.
बाजार से सामान लाना भी हुआ मुश्किल
पानी भर जाने से लोगों के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो गये हैं. बाजार से जरूरी सामान लाने के लिए लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है.
बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने में भी अभिभावकों को परेशानी हो रही है. घर के सामान्य कामकाज से लेकर आवागमन तक पर बाढ़ का सीधा असर पड़ा है.
नलों में भी पहुंच रहा बाढ़ का पानी, बीमारी का खतरा
बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चिंता पीने के पानी की शुद्धता को लेकर सामने आ रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ घरों के नलों में भी बाढ़ का पानी आने की शिकायत है.
दूषित पानी के इस्तेमाल से लोगों में डायरिया और चर्म रोग जैसी समस्याएं बढ़ने की बात सामने आ रही है. बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर परिवारों की चिंता और बढ़ गयी है.
लोगों का कहना है कि यदि जल्द स्वच्छ पेयजल और दवाओं की व्यवस्था नहीं की गयी तो स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और बढ़ सकती है.
राहत की आस में प्रभावित परिवार
बाढ़ प्रभावित लोगों ने प्रशासन से स्वच्छ पेयजल, दवा और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है.
लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ शहरी इलाकों में भी पानी लगातार फैल रहा है. ऐसे में प्रशासन को प्रभावित मोहल्लों में तत्काल राहत और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए.
फिलहाल कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ लोग मजबूरी में अपने घरों की ऊपरी मंजिल या छत पर रह रहे हैं.
