गढ़ग्राम की रोशनी किस्कू तकनीक आधारित खेती कर बनी आत्मनिर्भर

जेएसएलपीएस के जियोर झरना आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली किस्मत

बरहरवा

प्रखंड क्षेत्र की बटाइल पंचायत के बड़ा गढ़ग्राम की रहने वाली रोशनी किस्कू अपने संघर्ष व मेहनत के बल पर आत्मनिर्भर किसान बनकर उभरी हैं. एक समय था जब वह रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर थी, लेकिन आज वह अपने क्षेत्र के किसानों को सफलता की नयी राह दिखा रही है. रोशनी के सफल किसान बनने की यात्रा की शुरुआत 2019 में हुई, जब उन्होंने उन्होंने जेएसएलपीएस के जियोर झरना आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आधुनिक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण लिया तथा आधुनिक तरीकों से खेती शुरू की. इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया. रोशनी बताती हैं कि उनकी तीन बेटियां हैं तथा उनके पति रामदास मुर्मू पहले छोटे किसान थे और पारंपरिक तरीके से खेती और मजदूरी करते थे. जिससे कम उत्पादन होता था और आमदनी सालाना महज 40-50 हजार रुपये ही हो पाती थी. इससे परिवार के भरण-पोषण में काफी कठिनाई होती थी. इस कारण उनका परिवार मजदूरी के लिए पलायन करने की सोच रहा था.

समूह से जुड़कर लिया 50 हजार का ऋण, शुरू की आधुनिक खेती

2019 में समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने 50 हजार रुपये का ऋण लेकर 20 बीघा जमीन में खेती शुरू की. इस दौरान उन्होंने समेकित कृषि संकुल से जुड़कर खेती-बाड़ी और पशुपालन से संबंधित प्रशिक्षण लिया. साथ ही संकुल द्वारा उन्हें समय-समय पर विभिन्न फसलों का बीज भी मुहैया कराया जा रहा है. रोशनी ने बताया कि वह वर्तमान में धान, गेहूं, सरसों की परंपरागत फसलों के अलावे टमाटर, बैंगन, कद्दू, नेनुआ जैसी सब्जियों की आधुनिक खेती शुरू की. इसके साथ ही उन्होंने करीब 3 कट्ठा जमीन पर बांस की खेती और सूकर पालन भी शुरू किया. वह अपनी उपज की सब्जियों को स्वयं सालभर स्थानीय हाट और बाजारों में बेचती हैं. जिनसे उनके आमदनी में काफी बढ़ोतरी हुई है. बताया खेतीबारी से सालाना करीब 80 हजार रुपये, सूकर पालन से 30 हजार रुपये और बांस की खेती से 20 हजार की कमाई कर आत्मनिर्भर बन गयी हैं और क्षेत्र में एक सफल किसान के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं.

कहते हैं अधिकारी

जेएसएलपीएस के बीपीएम फैज आलम ने बताया कि झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण और मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है. जिससे वह खेती पशुपालन एवं अन्य आजीविका संबंधित गतिविधियों के माध्यम से अपने आय को बढ़ाकर लखपति दीदी बन रही हैं.

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By ABDHESH SINGH

ABDHESH SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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