25 हजार से अधिक प्रवासी पक्षी पहुंचे उधवा झील आश्रयणी

एशियन वॉटरबर्ड सेंसस टीम ने उधवा में पक्षियों की गणना की

उधवा. एशियन वॉटरबर्ड सेंसस की टीम ने उधवा पक्षी आश्रयणी में झीलों का सर्वेक्षण कर प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की गणना की. इस वर्ष माइग्रेटरी बर्ड्स के साथ-साथ स्थानीय पक्षियों की भी बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज की गयी. सेंट्रल एशिया, मंगोलिया और साइबेरिया से आने वाले इन पक्षियों ने उधवा की झीलों को अपना अस्थायी आवास बनाया है. उधवा झील आश्रयणी में 50 से अधिक प्रजातियों के वॉटरबर्ड्स और वॉटर-डिपेंडेंट पक्षियों की पहचान की गयी. इस वर्ष लगभग 25,000 पक्षी झील में देखे गये हैं. विशेष रूप से, ब्लैक बिटर्न नामक पक्षी को पहली बार उधवा में देखा गया है, जो पक्षी विशेषज्ञों के लिए एक नयी उपलब्धि है. झारखंड के अन्य झीलों में पक्षियों की स्थिति एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के राज्य समन्वयक, डॉ. सत्य प्रकाश, ने जानकारी दी कि इस वर्ष बरहेल झील में लगभग 8,000 , पतौड़ा में 2,000-2,500 , और पुरुलिया में करीब 8,000 पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गयी है. यह संख्या झीलों में पक्षियों की समृद्धि और उनकी विविधता को दर्शाती है. वहीं, बिहार के राज्य समन्वयक, अरविंद मिश्रा, ने उधवा की झीलों को गजब की जगह बताते हुए कहा कि पतौड़ा झील में पक्षियों का अद्भुत जुटान होता है. बरहेल झील, जो अपेक्षाकृत कम गहराई वाली है, पक्षियों की विविधता और उनकी प्रजातियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. विशेष प्रजातियां और पक्षी झुंड: पक्षी विशेषज्ञों ने बताया कि इस वर्ष झीलों में कॉमन टिल, नॉर्दर्न पिंटेल, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, गार्गिनी, गडवाल, और ब्लैक नेक स्टर्ड जैसे पक्षियों का बड़ा झुंड देखा गया है. इन पक्षियों में से कुछ प्रवासी हैं, जो झीलों के अनुकूल पर्यावरण को दर्शाते हैं. इस सर्वेक्षण में इंडियन बर्ड कंजर्वेशन नेटवर्क के सदस्य अमित जैन, मुरारी सिंह, वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग, उप वन परिसर पदाधिकारी इंद्रजीत भारती, बर्ड वॉचर कामदेव कुमार, मनीष कुमार चौधरी, डॉल्फिन प्रहरी अजीजूर रहमान, और वन कर्मी कुंदन कुमार ने भाग लिया. उनकी मेहनत और समर्पण ने पक्षियों की विस्तृत गणना और प्रजातियों की पहचान को संभव बनाया.

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