पतौड़ा झील में दुर्लभ पक्षी की रेस्क्यू, अवैध शिकार पर वन विभाग ने की कार्रवाई

जाल में फंसी पौंड हीरोइन पक्षी को सुरक्षित बचाया, शिकार करने वालों की पहचान कर कार्रवाई का आश्वासन

उधवा सर्दियों के मौसम में प्रखंड के पक्षी अभ्यारण्य पतौड़ा झील में विदेशी और स्थानीय पक्षियों की चहचहाहट मन को आनंदित करती है. लेकिन कुछ असामाजिक तत्व इस प्राकृतिक दृश्य का दुरुपयोग कर पक्षियों का अवैध शिकार कर रहे हैं. प्रखंड क्षेत्र के राधानगर, चांदशहर और पतौड़ा झील के आसपास खुले क्षेत्रों में पक्षियों का शिकार किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, विदेशी पक्षियों की कुछ खास प्रजातियों को चोरी-छिपे ऊंचे दामों में बेचा जाता है. ताजा मामला रविवार को सामने आया, जब प्रखंड क्षेत्र के चांदशहर गांव के बहियार झील के किनारे जाल में उलझी और घायल अवस्था में दुर्लभ प्रजाति की पौंड हीरोइन पक्षी पायी गयी. अनुमान है कि पक्षियों का शिकार करने के लिए जाल बिछाया गया था. गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पक्षी को सुरक्षित रेस्क्यू कर तालझारी वन कार्यालय इलाज के लिए ले जाया. वन कर्मी अखिलेश कुमार मरांडी ने बताया कि घटनास्थल से शिकार में प्रयुक्त जाल भी बरामद किया गया. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से वन्यजीवों के अवैध शिकार का प्रयास था, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मामले की जांच जारी है और जाल बिछाने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी. अखिलेश कुमार ने आम लोगों से अपील की कि वन्यजीवों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है. यदि कहीं भी वन्यजीवों के शिकार या उन्हें नुकसान पहुंचाने की सूचना मिले, तो तुरंत प्रशासन या वन विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते इन जीवों की रक्षा की जा सके. क्षेत्र में पक्षियों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है. उल्लंघन करने वालों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सात वर्ष तक की जेल, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. मौके पर फॉरेस्ट गार्ड अखिलेश कुमार मरांडी, पप्पू कुमार यादव, गंगा प्रहारी अजिजुर्रहमान, शमीम अख्तर सहित अन्य वनकर्मी मौजूद थे.

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Published by: Abdhesh singh

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