प्रवचन :: सावधानीरहित सम्मोहन गहन निद्रा जैसाइसके विषय में समझाने की महत्वपूर्ण बात यह है कि गहन मूर्छावस्था (जो केवल 10%लोगों में होती है) में व्यक्ति सावधान बना रहता है, क्योंकि सावधानीरहित सम्मोहन गहन निद्रा जैसा होता है. भले ही व्यक्ति मूर्छावस्था से बाहर न आये ; नींद लग जायेगी और कुछ समय बाद वह एकाएक जाग उठता है. अनेक सम्मोहनकर्ता यह भी कहते पाये गये हैं कि सम्मोहित व्यक्ति द्वारा उसक इच्छा और नैतिक आदर्शों के विरुद्ध कुछ भी नहीं कराया जा सकता. व्यावसायिक स्तर पर व्यक्ति (विषय) तथा सम्मोहनकर्ता के बीच किसी लक्ष्य को लेकर समझौता रहता है. फिर विषय की मानसिक दशाओं में परिवर्तन कर दानों मिलकर लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कार्य करते हैं. सम्मोहन का अध्ययन करने पर हमें इसमें कुछ भी नया नहीं मिलता यद्यपि यह प्राचीन काल से हमारे बीच है परंतु हम ही उसे भूल से जाते हैं.
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प्रवचन :: सावधानीरहित सम्मोहन गहन निद्रा जैसाइसके विषय में समझाने की महत्वपूर्ण बात यह है कि गहन मूर्छावस्था (जो केवल 10%लोगों में होती है) में व्यक्ति सावधान बना रहता है, क्योंकि सावधानीरहित सम्मोहन गहन निद्रा जैसा होता है. भले ही व्यक्ति मूर्छावस्था से बाहर न आये ; नींद लग जायेगी और कुछ समय बाद वह […]
