प्रवचन : योगनिद्रा में संकल्प का आधार सम्मोहनसम्मोहन शब्द का अर्थ बड़ा अस्पष्ट है, क्योंकि इसका तात्पर्य चेतना का परिवर्तित अवस्थाओं से है न कि किसी एक स्पष्ट परिभाषित अवस्था से. चेतना की अवस्था में व्यक्तियों के अनुसार भेद पाये जाते हैं. कुछ सम्मोहनकर्ता कहते हैं कि सम्मोहन वह अवस्था है जिसमें आपकी चेतना प्रखर और संकीर्ण होकर केंद्रित होती है. इसे अन्तर्मुखी सावधानी तथा गहनता की अवस्था भी कह सकते हैं. अनेक लोग इस बात से सहमत हैं कि सम्मोहन में मूर्छा की अवस्था में मन से कुछ कार्य कराये जाते हैं. सम्मोहन या तो किसी बाहरी माध्यम द्वारा अथवा बिना माध्यम के आत्मनिर्देश द्वारा किया जा सकता है. मूर्छा की अवस्था में चेतना अवचेतन मन में लाई जाती है. जहां सम्मोहित व्यक्ति बिना किसी बाहरी बाधा के आदेशों का मुक्तरूप से पालन करता है. अचेतन मन में स्थापित सुझाव बड़े शक्तिशाली होते हैं. योगनिद्रा में संकल्प का यही आधार है. अनेक लोगों में सम्मोहन के प्रति बड़ा भय रहता है, क्योंकि इसके बारे में नकारात्मक, पूर्वाग्रह और भ्रमपूर्ण प्रचार किया गया है.
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