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ओकके:::: सिंधीपाड़ा तालाब में पसरी है गंदगी मुहल्लेवासियों को सता रही है चिंता, कैसे मनायेंगे छठ? दूषित पानी से चर्म रोग का खतरा बढ़ाग्रामीण कई बार जिला प्रशासन से लगा चुके हैं इसके साफ-सफाई का गुहारप्रशासन ने अबतक नहीं ली सुध01 नवंबरफोटो संख्या- 01 पाकुड़ से जा रहा हैकैप्सन- तालाब परिसर में पसरी गंदगीकोर्ट प्रतिनिधि, […]

ओकके:::: सिंधीपाड़ा तालाब में पसरी है गंदगी मुहल्लेवासियों को सता रही है चिंता, कैसे मनायेंगे छठ? दूषित पानी से चर्म रोग का खतरा बढ़ाग्रामीण कई बार जिला प्रशासन से लगा चुके हैं इसके साफ-सफाई का गुहारप्रशासन ने अबतक नहीं ली सुध01 नवंबरफोटो संख्या- 01 पाकुड़ से जा रहा हैकैप्सन- तालाब परिसर में पसरी गंदगीकोर्ट प्रतिनिधि, पाकुड़जैसे-जैसे छठ पूजा का समय नजदीक आ रहा है. वैसे-वैसे सिंधिपाड़ा मुहल्लेवासियों को चिंता सताये जा रही है कि इस बार छठ व्रती कहां और कैसे छठ मनायेंगे. सिंधीपाड़ा मोहल्ला में जिस पोखर में वर्षों से छठ व्रती पर्व मनाते आ रहे हैं. उस पोखर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है. पोखर का पानी भी पूरी तरह से दूषित हो गया है. जिसका उपयोग करने से ग्रामीणों को चर्म रोग का भय सता रहा है. मुहल्लेवासियों ने बताया कि पहले यह पोखर साढ़े तीन बीघा क्षेत्र में फैला हुआ था, जो अब महज छह कट्ठा में ही सिमट कर रह गया है. इस बात को लेकर मुहल्लेवासियों द्वारा जिला प्रशासन को लिखित रूप से कई बार सूचित भी किया गया. लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की जा सकी है. मुहल्लेवासियों का कहना है कि वर्ष 1965 से नियमित रूप से समिति का गठन कर छठ पूजा मनाया जाता रहा है. समिति द्वारा ही छठ पूजा के समय पोखर की साफ-सफाई और लाइटिंग आदि की सुविधा मुहल्लेवासियों के सहयोग से किया जाता रहा है. सफाई के नाम पर नप करती है खानापूर्तिमुहल्लेवासियों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नवयुवक छठ पूजा समिति द्वारा साफ-सफाई व लाइटिंग की व्यवस्था की जाती है. नगर परिषद द्वारा सिर्फ कमेटी के सदस्यों को कहा जाता कि आपलोग साफ-सफाई करें. उस पर आने वाला खर्च नगर परिषद वहन करेगी. लेकिन काम होने के बाद नगर परिषद हमेशा अपना मुंह मोड़ लेती है. तालाब के पानी से बनता था खाना, अब नहाने से डरते हैं लोगमुहल्लेवासियों ने बताया कि पूर्व में इस पोखर से हम मुहल्लेवासियों के घर का चूल्हा-चौका चलता था और यह पानी पीने के भी काम में आता था. लेकिन मुहल्ले के लोगों द्वारा अब यह पानी उपयोग में नहीं लाया जाता है. क्योंकि उक्त पोखर का पानी पूरी तरह से दूषित हो गया है. कहते हैं समिति के अध्यक्ष फोटो संख्या-02-भीम सिंहनवयुवक छठ पूजा समिति के अध्यक्ष भीम सिंह का कहना है कि तालाब संकरा होने के कारण छठ व्रतियों को छठ मनाने में परेशानी होती है. उन्होंने प्रशासन से छठ से पूर्व पोखर का विस्तार और साफ-सफाई किये जाने की मांग की है. – भीम सिंहफोटो संख्या-03-अनूप भगतसमिति के उपाध्यक्ष अनूप भगत ने बताया कि तालाब की साफ-सफाई का कार्य पिछले कई वर्षों से समिति द्वारा ही किया जा रहा है. इसमें ग्रामीणों का सहयोग काफी सराहनीय रहता है. प्रशासन द्वारा अगर सहयोग किया जाय तो छठ पर्व सुंदर तरीके से मनाया जा सकता है.- अनूप भगतफोटो संख्या-04- फूलवती देवीमुहल्लावासी फूलवती देवी ने बताया कि वह स्वयं कई वर्षों से इस पोखर में छठ व्रत कर रही है. समिति के लोग के सहयोग से ही छठ कर पाते हैं. लेकिन प्रशासन द्वारा कोई सुविधा नहीं होने के कारण बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है.- फूलवती देवीफोटो संख्या-05-पूनम देवीवार्ड पार्षद पूनम देवी जो स्वयं छठ पर्व करती है. उन्होंने भी बताया कि पोखर जो पहले विस्तृत हुआ करता था, आज पोखर का स्वरूप सिमट कर गड्ढे में तब्दील हो गया है. जिस कारण छठ पर्व मनाने में असुविधा हो रही है और समुचित साफ-सफाई की भी व्यवस्था अभी तक नहीं की जा सकी है. – पूनम देवीफोटो संख्या-06-महावीर भगतमहावीर भगत ने बताया कि पहले हमलोग इस तालाब का पानी पीने व खाना बनाने में उपयोग करते थे. अब ये पानी पूरी तरह से गंदा हो गया है. जिसमें स्नान करने से भी डर लगता है.- महावीर भगतफोटो संख्या-07-श्याम सुंदर शर्माश्याम सुंदर शर्मा जो स्वयं उस पोखर के किनारे निवास करते हैं. बताया कि बाहरी लोग इस पोखर में आ कर कूड़ा-करकट डाल रहे हैं. जिससे इस पोखरा का आकार छोटा हो गया है और यहां गंदगी जमा हो गया है.- श्याम सुंदर शर्मा**************************पोखर विस्तार को लेकर उपायुक्त को लिखा पत्र मुहल्ला बलिहारपुर के निवासी संजीत कुमार भगत ने उपायुक्त पाकुड़ को लिखित आवेदन देकर सिंधीपाड़ा मोहल्ला के जैन मंदिर रोड स्थित पोखर की साफ-सफाई एवं उसका विस्तार करने और समुचित लाइटिंग व्यवस्था की मांग की है. ताकि मुहल्ले के छठ व्रती सकुशल छठ मना सके. उन्होंने बताया कि इस पोखर में पर्व को लेकर 1965 से छठ पूजा समिति का गठन किया गया है. जबकि 1965 से पूर्व भी लोग इस पोखर में छठ पर्व किया करते थे और इसी पोखर के पानी से पूजा के लिए खरना का प्रसाद बनाया करते थे. लेकिन पोखर के दूषित हो जाने से परेशानी बढ़ गयी है.

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