साहिबगंज : झारखंड के एक मात्र गंगा तट पर एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है . हालांकि खतरे का निशान अभी लगभग चार मीटर दूर है. केंद्रीय जल आयोग साइट इंचार्ज रंजीत कुमार मिश्र ने बताया कि जून में गंगा नदी का जलस्तर 22.70 मीटर तक रहा. तीन जुलाई को सुबह 8 बजे 13 सिमी वृद्धि के साथ 24.05 मीटर तक पहुंच गया.
नहीं बन पायी स्थायी साइट
यहां केंद्रीय जल आयोग की स्थायी साइट का निर्माण नहीं हो सका है. साइट इंचार्ज रंजीत कुमार मिश्र ने बताया कि इलाहाबाद, बनारस, बक्सर, पटना, हाथीदाह, मुंगेर, भागलपुर, कहलगांव व फरक्का में स्थायी साइट है.
पिछले वर्ष की तुलना में कम हो रही वृद्धि
पिछले वर्ष की तुलना में जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार धीमी है. आंकड़ों की माने तो तीन जुलाई 2014 में जलस्तर 27.49 मीटर था. इस वर्ष तीन जुलाई शुक्रवार को सुबह 8 बजे जलस्तर 24.05 मीटर रहा.
438 गांव बाढ़ प्रभावित
जिले के पांच अंचल साहिबगंज, राजमहल, उधवा, बरहरवा, अंश व तालझारी के कुल 438 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं.
सुरक्षा व बचाव कार्य के लिए सरकारी नौका नहीं
आपदा प्रबंधन के तहत बाढ़ के दौरान सुरक्षा व बचाव कार्य के लिए जिला प्रशासन के पास सरकारी नाव नहीं है . एसी निरंजन कुमार ने बताया कि बाढ़ के समय गैर सरकारी कुल छोटी बड़ी 244 नाव का अधिग्रहण किया जाता है .
एनएच 80 को भी खतरा
गंगा नदी का दायां तट जिले में लगभग 83 किमी की लंबाई में फैला है . वहीं महाराजपुर से राजमहल तक 20 किमी में एनएच 80 सड़क गंगा के समानांतर होकर गुजरती है . प्रत्येक वर्ष बाढ़ के कारण एनएच 80 को कटाव की मार ङोलनी पड़ती है .
बाढ़ से निबटने के लिए प्रशासन तैयार : एसी
आपदा प्रबंधन के तहत बाढ़ से निबटने के लिए जिला प्रशासन तैयार है. यह बातें अपर समाहर्ता निरंजन कुमार ने कही. उन्होंने बताया कि बचाव व राहत कार्य के लिए प्रशासनिक पदाधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. शिक्षकों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जायेगा.
बचाव कार्य के लिए नाव, एलसीटी, लंच के अलावा प्रशासन के पास लगभग 300 लाइफ जैकेट है. आपदा प्रबंधन से राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां केंद्रीय जल आयोग की स्थायी साइट का निर्माण नहीं किया जा सका है.
शहर के निचले इलाकों में भी बाढ़ का खतरा
शहर के निचले इलाकों में भी बाढ़ का खतरा है. बाढ़ से प्रतिवर्ष रसुलपुर दहला, कमलटोला, हबीबपुर, हस्पिर, भरतिया कॉलोनी, पटनिया टोला, बनपर टोला, गोपालपुर का निचला हिस्सा प्रभावित होता है.
