विकास के नाम पर नहीं देंगे कीमती जमीन
रोष. ढोल-नगाड़े के साथ जुलूस निकाल कर आदिवासियों ने किया समाहरणालय का घेराव, कहा... स्मार्ट सिटी व औद्योगिक क्षेत्र के लिए 5000 एकड़ भूमि अधिग्रहण की है योजना प्रदर्शन के दौरान चाक-चौबंद रही समाहरणालय की सुरक्षा व्यवस्था 1000 की संख्या में आदिवासियों ने किया प्रदर्शन कहा : जान दे देंगे, पर नहीं देंगे रैयती जमीन […]
रोष. ढोल-नगाड़े के साथ जुलूस निकाल कर आदिवासियों ने किया समाहरणालय का घेराव, कहा
स्मार्ट सिटी व औद्योगिक क्षेत्र के लिए 5000 एकड़ भूमि अधिग्रहण की है योजना
प्रदर्शन के दौरान चाक-चौबंद रही समाहरणालय की सुरक्षा व्यवस्था
1000 की संख्या में आदिवासियों ने किया प्रदर्शन
कहा : जान दे देंगे, पर नहीं देंगे रैयती जमीन
साहिबगंज : आदिवासी भूमि संरक्षण समिति के बैनर तले हजारों की संख्या में आदिवासी रैयतों ने जमीन अधिग्रहण के विरोध करते हुए जुलूूस निकाल कर गुरुवार को समाहरणालय का घेराव किया. इस दौरान 39 मौजा के 1000 आदिवासियों ने ढोल-नगाड़े के साथ विरोध पदर्शन करते कहा कि जान दे देंगे पर अपनी रैयती जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे. कहा कि विकास के नाम पर सरकार उनकी खेती की जमीन छीनने की साजिश रच रही है. इसे कभी पूरा नहीं होने दिया जायेगा. प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन डीसी के माध्यम से सौंपा.
आदिवासी रैयत साफ शब्दों में कहा कि हम विकास के नाम पर अपनी जमीन सरकार को लूटने नहीं देंगे. हमारी जमीन ही हमारी अन्नदाता है. पीढ़ियों से हम इसी जमीन के टुकड़े पर पलते-बढ़ते आ रहे हैं. फसल की उपज से परिवार का भरण-पोषण करते हैं. सरकार सागरमल योजना व स्मार्ट सिटी के नाम पर हड़पना चाहती है. जमीन दे देंगे तो भूखे मर जायेंगे. रैयतों को अधिक पैसे की लालच दिया जा रहा है. रैली में आदिवासी समाज अपने छोटे-छोटे बच्चे, महिला, बुजुर्ग पुरुष के साथ सड़क पर उतरे थे. बड़ा पंचगढ़ झंडा मेला से शुरू हुई रैली ज्योति मोड़, समाहरणालय के पीछे, विकास भवन, होकर समाहरणालय पहुंचे, ज्ञापन सौंपने के बाद पुलिस लाइन, पूर्वी फाटक, चैती दुर्गा, कॉलेज रोड, स्टेशन रोड होते हुए इंस्टीट्यूट पहुंची. बिरसा मुंडा की जयंती मनाने के बाद आमसभा का भी आयोजन किया गया.
क्या कहते हैं आदिवासी नेता
अधिसूचित क्षेत्र में सरकार किसी भी योजना के लिए जमीन अधिग्रहण 80 फीसदी ग्रामीणों की सहमति ग्रामसभा के माध्यम से लेना अनिवार्य है.
बालदेव उरांव, सदस्य
प्रधानी जमीन को सरकार ग्राम प्रधान की सहमति से ही अधिग्रहण कर सकती है. योजना में खेती की जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे.
रीता रानी हेंब्रम, ग्राम प्रधान
सरकार की नजर जिस जमीन पर औद्योगिक हब और स्मार्ट सिटी की योजना है. इसके छीन जाने से आदिवासी भूखे मर जायेंगे.
पौलूस मुर्मू, सदस्य
बड़ा तौफिर व उसके आसपास के सभी ग्रामीण बहुत ही गरीब है जिसकी जमीन ही जमा पूंजी है. यह यदि इनसे छिन जाते है तो यह गरीब मर जायेगा.
वीर कुमार मुंडा, पूर्व मुखिया
प्रदर्शन के बाद बिरसा मुंडा की मनायी जयंती
डीसी कार्यालय के घेराव के बाद सभी आदिवासी ग्रामीण शहर के मुख्यमार्ग से होते हुए रेलवे जनरल इंस्टीट्यूट में भगवान बिरसा मुंडा का जयंती मनायी . नेताओं ने जनसभा कर लोगों को संबोधित किया. इस रैली का नेतृत्व बालदेव उरांव ने किया. मौके पर वीरेंद्र मुर्मू, पौलूस मुर्मू, बोका मुंडा, रॉबर्ट सोरेन, धर्मेंद्र उरांव, गायना उरांव, बीरकुमार मुंडा, रीता रानी हेंब्रम,आरमेट, गैना उरांव, महेंद्र उरांव, सहदेव उरांव आदि उपस्थित थे.
सागरमाल योजना से प्रभावित हैं 39 मौजा के ग्रामीण
जिले में सागरमाला योजना के तहत बंदरगाह व गंगा पुल के बीच प्रस्तावित औद्योगिक हब व स्मार्ट सिटी के लिए लगभग 5000 एकड़ सरकार अधिग्रहण करना चाहती है. इसके लिए पदाधिकारी बार लोहंडा, बड़ा तौफिर क्षेत्रों का दौरा भी कर चुके हैं. ग्रामीणों के अनुसार जमीन बहुफसली कृषि भूमि है. इसमें 39 मौजा के 100 गांव के ग्रामीण प्रभावित होंगे. औद्योगिक हब व स्मार्ट सिटी योजना से सभी रैयतों में भय है. इसमें 90 फीसदी रैयत आदिवासी है. शेष 10 फीसदी रैयत गैर आदिवासी है.
कौन-कौन गांव होंगे प्रभावित
स्मार्ट सिटी व सागर माला योजना से बड़ा तौफिर, बड़ा मदनशाही, भगियामारी, दुर्गा टोला, मातीझरना, अदरो, अंबाडीहा, बड़ा लोहंडा, बड़ा मदनशाही, बड़ा पांगडो, बड़ा सोलबंधा, बड़ा तौफिर, बड़ा तेतरिया, बड़ा बेतौना, बेडोपरते, बोहा, छोटा लोहंडा, छोटा भगियामारी, छोटा मदनशाही, छोटा पांगडो, छोटा सोलबंधा, छोटा तौफिर, छोटा तेतरिया, घोघी, गोपालचौकी, हाथीगढ़, जमनी, झगरूचौकी, जोकमारी, कोरोकुरिया, मीरा पहाड़, नीरापाड़ा, पोलमा, पलटनगंज, पिंडारी, रामपुर, सकरीबाजार, समदानाला, सोतीचौकी पांगडो आिद के ग्रामीण प्रभावित होंगे.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
सरकार के नियम पूर्वक मुआवजा दिया जा रहा है. फिर भी ग्रामीण विरोध कर रहे हैं. प्रशासन ग्रामीणों के साथ बैठक कर मुआवजा देने व जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चलायेगी.
अनमोल कुमार सिंह, एसी
