रांची जिले में 113 इमारतों पर लगे रूफटाॅप सोलर पैनल, 2070 तक नेट-जीरो के स्तर तक पहुंचने की ओर मजबूत कदम

प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य बहुत खास इसलिए है क्योंकि ग्लास्गो में भारत ने 2070 तक नेट-जीरो के स्तर तक पहुंचने का वादा किया है और इसी लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में झारखंड भी अपना योगदान दे रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में कहा था कि देश ने सीओपी-26 में पर्यावरण के लिए जीवनशैली का एक दृष्टिकोण सामने रखा है. पीएम मोदी ने कहा भारत ने अपने लिए जो भी लक्ष्य तय किए हैं, उसे मैं चुनौती की तरह नहीं बल्कि अवसर की तरह देखता हूं. इसी दृष्टिकोण पर भारत बीते वर्षों से चल रहा है और इस बजट में इनको नीतिगत स्तर पर और आगे बढ़ाया गया है.

भारत का 2070 तक नेट-जीरो के स्तर तक पहुंचने का वादा

प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य बहुत खास इसलिए है क्योंकि ग्लास्गो में भारत ने 2070 तक नेट-जीरो के स्तर तक पहुंचने का वादा किया है और इसी लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में झारखंड भी अपना योगदान दे रहा है.

तीन हजार केडब्ल्यूपी का रूफटाॅप पैनल सोलर पैनल

झारखंड में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जेरेडा सतत प्रयत्नशील है और ना सिर्फ ग्रामीण इलाकों में बल्कि शहरी इलाकों में भी सौर ऊर्जा के कई पैनल लगाये जा रहे हैं, जिससे बिजली की आपूर्ति हो रही है. रांची जिले में साढ़े तीन हजार केडब्ल्यूपी का रूफटाॅप पैनल सोलर पैनल लगा है.

113 इमारतों पर रूफ टाॅप सोलर पैनल लगाये गये

जेरेडा द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न कार्यालयों, अस्पतालों, पार्क और कई अन्य इमारतों पर रूफटाॅप पैनल गया गया है, जिसमें सबसे अधिक क्षमता का पैनल रांची रिम्स में लगाया है. यहां 400 केडब्ल्यूपी का पैनल लगा है जो राज्य के सबसे बड़े अस्पताल की बिजली की जरूरतों को यह पूरा करता है. रांची जिले में अबतक 113 इमारतों पर रूफ टाॅप सोलर पैनल लगाया गया है. जिनमें रांची कमिशनरी, होटवार जेल, रिम्स, रिनपास, ओरमांझी जू, नेशनल लाॅ काॅलेज आदि शामिल हैं.

जेरेडा की रूफ टाॅप पाॅलिसी की शुरुआत 2018 में हुई

जेरेडा की रूफ टाॅप पाॅलिसी की शुरुआत 2018 में हुई है. इस योजना का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन पर निर्भरता को कम करना है. रूफ टाॅप सोलर पैनल प्रदेश के कई सरकारी इमारतों पर लगाया गया है और वहां की बिजली की जरूरतों को पूरा किया जा रहा है. इस पाॅलिसी की मदद से बिजली की हमारी भविष्य की मांगों को पूरा करने में भी सहयोग मिलेगा और यह पाॅलिसी आने वाले दिनों में काफी महत्वपूर्ण हो जायेगी.

बंजर भूमि पर भी सोलर पैनल लगाया गया

झारखंड सरकार रूफटॉप सोलर पैनल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी कई बार बयान दिया है. इमारतों के अलावा इस योजना के तहत बंजर भूमि पर भी सोलर पैनल लगाया जाता है और उसका उपयोग किया जाता है. इस योजना का मूल उद��देश्य पर्यावरण के अनुकूल सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना और आम लोगों को सस्ते दर पर बिजली उपलब्ध कराना है.

दुर्गम इलाकों पर बिजली पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

गौरतलब है कि हेमंत सोरेन सरकार ने झारखंड में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दुर्गम इलाकों जहां ग्रिड के जरिये विद्युतीकरण संभव नहीं है वहां सोलर पैनल द्वारा बिजली पहुंचाया जा रहा है. झारखंड बिजली वितरण निगम ऐसे सुदूरवर्ती गांवों को चिह्नित कर वहां सौर ऊर्जा के जरिये बिजली पहुंचाया. आगे भी इस योजना पर काम किया जा रहा है. झारखंड सरकार दुर्गम इलाकों में स्थित गांवों या कस्बों का 100 प्रतिशत सब्सिडी के तहत स्थापित मिनी ग्रिड अथवा सोलर स्टैंड एलोने होम लाइटिंग सिस्टम के जरिए विद्युतीकरण करने की योजना पर काम हो रहा है.

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लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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