साहिबगंज में फ्लोराइड और आर्सेनिक मुक्त वाटर सप्लाई कब होगी शुरू, हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल

झारखंड हाईकोर्ट ने साहिबगंज के ग्रामीण इलाकों में फ्लोराइड और आर्सेनिक मुक्त मेधा पेय जलापूर्ति योजना में देरी पर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है. 2012 से लंबित इस जनहित याचिका पर अदालत ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया है.


Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने साहिबगंज के ग्रामीण इलाकों में फ्लोराइड और आर्सेनिक मुक्त मेधा पेय जलापूर्ति योजना शुरू नहीं होने पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा कि आखिर फ्लोराइड और आर्सेनिक से मुक्त पेयजल आपूर्ति कब शुरू होगी. अदालत ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव को इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की गई है.

2012 में बनी थी योजना, अब तक नहीं हुई शुरू

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि साहिबगंज के ग्रामीण क्षेत्रों में मेधा पेय जलापूर्ति योजना वर्ष 2012 में शुरू करने की योजना बनाई गई थी. इस परियोजना का उद्देश्य प्रभावित गांवों तक फ्लोराइड और आर्सेनिक मुक्त सुरक्षित पेयजल पहुंचाना था. हालांकि, योजना तैयार होने के बावजूद आज तक इसे धरातल पर लागू नहीं किया जा सका. याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाया है, जिससे लोग आज भी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी मानी गंभीर स्थिति

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्वीकार किया है कि साहिबगंज के संबंधित क्षेत्रों के भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा सामान्य सीमा से काफी अधिक है. इन दोनों तत्वों की अधिक मात्रा वाला पानी लंबे समय तक पीने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. इसी तथ्य को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता ने अदालत से जल्द सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी निर्देश देने की मांग की.

प्रधान सचिव को दाखिल करना होगा जवाब

खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत जानना चाहती है कि मेधा पेय जलापूर्ति योजना अब तक क्यों शुरू नहीं हो सकी और इसे लागू करने की वर्तमान स्थिति क्या है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को यह बताना होगा कि प्रभावित ग्रामीण इलाकों में फ्लोराइड और आर्सेनिक मुक्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं.

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सिद्धेश्वर मंडल ने दायर की है जनहित याचिका

यह जनहित याचिका सिद्धेश्वर मंडल ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि साहिबगंज के कई ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से लोग फ्लोराइड और आर्सेनिक युक्त पानी पीने को विवश हैं, जबकि इस समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित मेधा पेय जलापूर्ति योजना अब तक शुरू नहीं हो सकी है. अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इस बहुप्रतीक्षित योजना की प्रगति पर सरकार को अदालत के समक्ष जवाब देना होगा. 24 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार की ओर से दाखिल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

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By Rana pratap

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