सावधान! झारखंड के 15 जिलों में ओलावृष्टि का मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

झारखंड के 24 में से 15 जिलों में शुक्रवार (17 मार्च) को ओलावृष्टि होगी. इसकी सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ेगी. खेत में लगी गेहूं, सरसों, दलहन, फल एवं सब्जियों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा. मौसम विभाग ने यह जानकारी दी है.

झारखंड के 24 में से 15 जिलों में शुक्रवार (17 मार्च) को ओलावृष्टि होगी. इसकी सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ेगी. खेत में लगी गेहूं, सरसों, दलहन, फल एवं सब्जियों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा. मौसम विभाग ने यह जानकारी दी है. इसमें कहा गया है कि राज्य के पूर्वी तथा निकटवर्ती मध्य भागों में कुछ जगहों पर ओलावृष्टि की संभावना है.

मौसम विभाग के अलर्ट में इन 9 जिलों का नाम नहीं

भारत मौसम विज्ञान विभाग के रांची स्थित मौसम केंद्र ने जो नक्शा जारी किया है, उसमें कहा गया है कि गढ़वा, पलामू, चतरा, कोडरमा, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा, सिमडेगा और गुमला को छोड़कर झारखंड के शेष जिलों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की संभावना है. खेत में लगी फसलों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.

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औंधे मुंह गिरेंगे गेहूं के पौधे

रांची के हिनू स्थित मौसम केंद्र की ओर से बुधवार को यानी 15 मार्च को झारखंड राज्य में कृषि क्षेत्र पर ओलावृष्टि का ‘प्रभाव आधारित पूर्वानुमान’ में कहा गया है कि इस ओलावृष्टि की वजह से गेहूं के दाने देर से पकेंगे. तेज ओलावृष्टि की वजह से गेहूं के पौधे गिर जायेंगे यानी लेट जायेंगे.

ओलावृष्टि से सरसों की फसल पर होंगे ये दुष्प्रभाव

इसमें आगे बताया गया है कि सरसों की खेत में जलभराव की वजह से फसल झुक जायेगी. इसकी वजह से इसकी जड़ों की वृद्धि रुक जायेगी. तना सड़ने लगेगा और अल्टरनेरिया ब्लाइट जैसी बीमारियां पौधे को हो सकती है. इतना ही नहीं, ओलावृष्टि की चपेट में आने वाले सरसों के पौधों की फलियां भी गिर सकती हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.

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दलहन की खेती भी होगी प्रभावित

दलहनी फसल के बारे में कहा गया है कि ओलावृष्टि हुई, तो फली का विकास सही से नहीं होगा. इसकी वजह से उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. पौधों में फफूंद रोग भी देखा जा सकता है. इससे बचने के लिए जलनिकासी की व्यवस्था करनी चाहिए. फसल की लगातार निगरानी करें. तैयार फसल को काटकर सुरक्षित और सूखे स्थान पर रख देना चाहिए. अगर ऐसा संभव न हो तो कटाई के लिए कुछ दिन इंतजार करना चाहिए.

झारखंड के इन जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट

पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, जामताड़ा, देवघर, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज में ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट मौसम केंद्र रांची की ओर से जारी किया गया है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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