विनय सिंह को दो केस में सुप्रीम कोर्ट से बेल, पत्नी को भी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने नेक्सजेन के मालिक विनय कुमार सिंह की ओर से दायर एसएलपी व स्निग्धा सिंह की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई की. विनय जमीन घोटाला मामले में आरोपी हैं.

रांची. सुप्रीम कोर्ट ने नेक्सजेन के मालिक विनय कुमार सिंह की ओर से दायर एसएलपी व स्निग्धा सिंह की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई की. विनय जमीन घोटाला मामले में आरोपी हैं. कोर्ट ने याचिकाकर्ता व राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद विनय कुमार सिंह को दो मामलों नियमित जमानत दी. इन मामलों में एसीबी रांची कांड संख्या 20/2025 व जगनाथपुर कांड संख्या 458/2025 शामिल हैं. वहीं एसीबी हजारीबाग कांड संख्या 11/2025 में पहले से मिली अंतरिम जमानत को कंफर्म किया. उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को तीन मामलों एसीबी हजारीबाग, एसीबी रांची व जगनाथपुर थाना में दर्ज मामले में राहत दी गयी है. इन तीनों मामलों में किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई से राहत देते हुए कोर्ट ने अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है. उनके खिलाफ पीड़क कार्रवाई करने पर रोक लगायी गयी है.

जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया

कोर्ट ने याचिकाकर्ता स्निग्धा सिंह को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है. जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षतावाली पीठ ने एसएलपी व रिट याचिका को स्वीकार करते हुए अपीलकर्ताओं के पक्ष में आदेश पारित किया. उल्लेखनीय है कि हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में आरोपी कारोबारी विनय कुमार सिंह के खिलाफ हजारीबाग एसीबी कांड संख्या-11/2025 दर्ज की गयी है. आरोप है कि विनय कुमार सिंह ने हजारीबाग में 28 डिसमिल गैरमजरुआ खास जंगल-झाड़ की सरकारी जमीन की खरीदारी की थी. अधिकारियों की मिलीभगत से उन्होंने गलत तरीके से दाखिल खारिज भी कराया था. विनय सिंह के खिलाफ हजारीबाग में जमीन घोटाला से संबंधित एक और मामला दर्ज किया गया है. उनके खिलाफ पांच मामले दर्ज किये गये हैं, जबकि उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को तीन मामलों में आरोपी बनाया गया है.

जमानत के बाद दर्ज किये दो केस, सुप्रीम कोर्ट ने

जतायी चिंता

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह यह देख कर स्तब्ध और चिंतित हैं कि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर भी याचिकाकर्ता के खिलाफ दो नये मामले दर्ज कर दिये गये. उन्हें रिमांड पर भी लिया गया. झारखंड सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा. इससे पूर्व याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता देवेश अजमानी व अधिवक्ता कुमार अभिषेक ने पैरवी की. उन्होंने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी दो नया केस दर्ज कर रिमांड पर लिया गया. याचिकाकर्ताओं को झारखंड पुलिस व एसीबी द्वारा परेशान किया जा रहा है. अधिवक्ताओं ने आशंका जतायी कि याचिकाकर्ताओं को आगे भी परेशान किया जा सकता है.

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