प्रखंड स्तरीय सरहुल मिलन समारोह में उमड़े ग्रामीण

प्रकृति पर्व सरहुल फाल्गुन महीने के बाद नये वर्ष के रूप में मनाया जाता है.

लापुंग.

प्रकृति पर्व सरहुल फाल्गुन महीने के बाद नये वर्ष के रूप में मनाया जाता है. पेड़ों व पौधों में नये कोमल पत्तों, आम में लगे मंजर व सखुआ के फूल सभी का मन मोह लेता है. इन्हीं फूलों से आदिवासी सरहुल पूजा करते हैं. पूजा के बाद नया अनाज का सेवन करते हैं. उक्त बातें प्रखंड स्तरीय सरहुल मिलन समारोह में मुख्य अतिथि सरना समाज के खूंटी जिलाध्यक्ष जय मंगल मुंडा ने कही. उन्होंने कहा कि जंगल में नया पत्ता व फूलों से भंवरे भी रसपान करते हैं. भगवान सिंगबोंगा और बाबा धर्मेश की कृपा से ग्रामीणों को नववर्ष की शुभकामना करते हैं. समारोह की अध्यक्षता जयंत बारला ने की. इससे पहले ग्रामीणों ने सापुकेरा बाजारटांड़ से शोभायात्रा निकाली. जिसमें सभी नाचते-गाते भगवान बिरसा मुंडा की पूजा कर अबीर-गुलाल लगाये और सखुआ फूल भेंट किया. बाजारटांड़ में विभिन्न गांवों के पहान-पुजारों को धोती व मेहमानों को सरना झंडा भेंट किया. शोभायात्रा में बोकरंदा, सापूकेरा, देवगांव, दोलाइंचा समेत अन्य पंचायतों के आदिवासी शामिल हुए. समारोह में गुड़वा हेरेंज, बीडीओ, सुदामा महली, मांगा तिर्की, सबिता उरांव, मालती रानी केरकेट्टा, बतिया उरांव, संतोष तिर्की, बिरसा मुंडा, विश्वनाथ मुंडा आदि मौजूद थे.

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