सदर अस्पताल में इलाज को लेकर हंगामा, डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं बंद की

सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक 18 वर्षीय युवक अकीब रजा के उपचार को लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया.

रांची. सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक 18 वर्षीय युवक अकीब रजा के उपचार को लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया. परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया. स्थिति बिगड़ते देख अस्पताल प्रबंधन को पुलिस बुलानी पड़ी, जिसके बाद मामला कुछ हद तक शांत हुआ. हिंदपीढ़ी निवासी अकीब रजा नामकुम में सड़क हादसे का शिकार होकर दोपहर करीब दो बजे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसे सिर में गंभीर चोट लगी थी. उस वक्त इमरजेंसी में डॉ पलक जायसवाल और डॉ राजीव रंजन ड्यूटी पर थे. प्राथमिक उपचार के बाद परिजनों को पर्चा बनाकर लाने को कहा गया, जिस पर वे भड़क गये और डॉक्टरों से बदसलूकी करने लगे. उन्होंने हिंदपीढ़ी से बड़ी संख्या में समर्थकों को बुला लिया और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया. परिजनों ने कर्मचारियों को नर्सों के सामने ही गाली-गलौज की. चिकित्सा कर्मियों, नर्सों और सुरक्षाकर्मियों से धक्का-मुक्की की गयी. साथ ही इमरजेंसी और उसके बाहर तोड़फोड़ करने लगे. हालात बेकाबू होते देख अस्पताल प्रबंधन ने लोअर बाजार थाना को सूचना दी. ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक ने परिजनों पर बदसलूकी का आरोप लगाया. इसके बाद डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने विरोध स्वरूप इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया. वे न्यायसंगत कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे. शाम छह बजे के बाद अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बिमलेश सिंह मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को आश्वस्त किया, जिसके बाद सभी ड्यूटी पर लौट आये. चिकित्सकों के अनुसार, मरीज को सिर और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोट लगी थी. प्राथमिक उपचार उनकी निगरानी में ही किया गया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हंगामा कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया. बाद में चार लोगों को हिरासत में लेकर लोअर बाजार थाना भेज दिया गया. मरीज के पिता मंसूर आलम ने आरोप लगाया कि सही देखरेख नहीं हुई. उनका कहना था कि अगर डॉक्टरों ने गंभीरता दिखाई होती, तो सदर अस्पताल में ही इलाज संभव था. रिम्स रेफर करने की नौबत नहीं आती. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल की सुविधाओं पर भरोसा कर ही मरीज को लाया गया था, लेकिन अपेक्षा के विपरीत देखभाल मिली.

चिकित्सकों ने की सुरक्षा की मांग

अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मियों ने परिसर में स्थायी पुलिस पिकेट बनाने की मांग की है. उनका कहना है कि आये दिन चिकित्सकों और स्टाफ के साथ मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं होती हैं. कुछ लोग खुद को मंत्री का आदमी बताकर धौंस जमाते हैं और जबरन काम करवाने का दबाव बनाते हैं. सुरक्षा के दृष्टिकोण से उन्होंने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की है.

इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं : सीएस

सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने बताया कि मारपीट करने के लिए लोगों को फोन कर बुलाया गया था. घटना के बाद विरोध स्वरूप अस्पताल कर्मियों ने प्रदर्शन किया, लेकिन किसी ने हड़ताल नहीं की. इस दौरान इमरजेंसी मरीजों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई. अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति को नियंत्रित रखा.

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Published by: Praveen

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