केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जारी की यू-डायस रिपोर्ट, झारखंड के 9827 स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे

झारखंड में125 ऐसे विद्यालय हैं जहां एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं है, लेकिन 43 शिक्षक तैनात हैं.

रांची से सुनील कुमार झा की रिपोर्ट

Jharkhand School News: झारखंड राज्य में 125 ऐसे विद्यालय हैं, जिनमें एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं है. विद्यालयों में भले ही एक भी विद्यार्थी नामांकित न हो, लेकिन 43 शिक्षकों की पदस्थापना है. इन शिक्षकों के वेतन पर सरकार प्रति माह लगभग 15 लाख रुपये से अधिक खर्च कर रही है. राज्य में शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है. 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी यू-डायस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में ऐसे विद्यालयों की संख्या 107 थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 125 हो गई है. यानी एक वर्ष में ऐसे स्कूलों की संख्या में लगभग 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही, एक शिक्षक वाले विद्यालयों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. राज्य में पिछले दो वर्षों में ऐसे विद्यालयों की संख्या में लगभग दो हजार की बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 9,827 स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं. इन स्कूलों में 4,40,346 विद्यार्थी नामांकित हैं. इनमें अधिकांश प्राथमिक विद्यालय हैं. इन स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई होती है. इन विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की पढ़ाई एक ही शिक्षक के भरोसे चल रही है. 

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ऐसे बढ़ रहे एक शिक्षक वाले स्कूल

वर्षकुल स्कूलनामांकित विद्यार्थी
2023–247,6423,78,898
2024–259,1784,36,480
2025–269,8274,40,346

बिना विद्यार्थियों वाले स्कूल

वर्षकुल स्कूलकार्यरत शिक्षक
2022-233701,368
2024-2510731
2025-2612543

दो वर्षों में 12 हजार शिक्षकों की नियुक्ति

राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पिछले दो वर्षों में लगभग 12 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. इसके बावजूद एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या बढ़ रही है. राज्य में औसतन जितने शिक्षकों की नियुक्ति हो रही है, उससे अधिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इसका प्रमुख कारण यह है कि सेवानिवृत्त होने वाले पारा शिक्षकों के स्थान पर नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है. राज्य में शिक्षकों के लगभग 50 हजार पद रिक्त हैं. 

शिक्षा विभाग ने जिलों को लिखा पत्र

शून्य नामांकन वाले स्कूलों के संबंध में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने पिछले वर्ष सभी जिलों को पत्र लिखा था. ऐसे विद्यालयों की आवश्यकता का आकलन करते हुए उनके संचालन को लेकर निर्णय लेने को कहा गया था. 

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Published by: Sweta Vaidya

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