Ranchi News : भक्ति, लोकनृत्य और गीतों से सजा सामा-चकेवा समारोह

झारखंड मैथिली मंच, रांची के तत्वावधान में विद्यापति दलान, हरमू के सामने स्थित छठ तालाब परिसर में सामा-चकेवा विसर्जन के अवसर पर समारोह का आयोजन किया गया.

भक्ति, लोकनृत्य और गीतों से सजा सामा-चकेवा समारोह

दिल्ली की गायिका कुमकुम मिश्र ने मैथिली गीतों से बांधा समा

रांची. झारखंड मैथिली मंच, रांची के तत्वावधान में विद्यापति दलान, हरमू के सामने स्थित छठ तालाब परिसर में सामा-चकेवा विसर्जन के अवसर पर समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर अतिथियों और पदाधिकारियों द्वारा महाकवि विद्यापति के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. सतीश कुमार मिश्र द्वारा शंखध्वनि और मंत्रोच्चार किया गया. इसके बाद विद्यापति रचित भगवती वंदना ‘जय जय भैरवी असुर भयावनि’ का सामूहिक गायन प्रस्तुत किया गया. अध्यक्ष बिनय कुमार झा ने अतिथियों और उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया. मुख्य अतिथि डॉ करूणा झा और विशिष्ट अतिथि डॉ प्रीति झा ने सामा-चकेवा पर्व के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी. इसके बाद मंच के संरक्षक व निवर्तमान पार्षद अरुण झा व महासचिव जयंत कुमार झा ने अपने विचार व्यक्त किये. छोटे-छोटे 15 बच्चों ने रामलीला आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें सीता हरण से लेकर रावण वध और राम के अयोध्या लौटने पर दीपावली मनाने तक की झलक दिखाई गयी. 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग के आठ बच्चों ने मैथिली मिश्रित गीतों पर लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जिसकी दर्शकों ने सराहना की.

स्थानीय कलाकार बबिता झा, नमीता मिश्र, रेनू झा, बिट्टू झा और मंजू झा आदि ने सामा-चकेवा के पारंपरिक गीत ‘सामा खेलय गेलौं भैया के आंगनमा’, ‘भोजो लेलनि डाला छीनि’ आदि गीतों से वातावरण को भावविभोर कर दिया. दिल्ली से पधारी गायिका कुमकुम मिश्र ने सामा-चकेवा से संबंधित विद्यापति गीतों और लोकगीतों से समां बांधा, जिस पर दर्शक झूम उठे. इस अवसर पर सामा-चकेवा से सुसज्जित सैकड़ों डाला का विसर्जन पूरे विधि-विधान के साथ पारंपरिक गीतों के बीच किया गया. प्रसाद वितरण के बाद सुसज्जित डाला को निर्णायक मंडल के निर्णयानुसार प्रथम, द्वितीय, तृतीय व सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया. धन्यवाद ज्ञापन प्रेमचंद्र झा ने किया और मंच संचालन बदरीनाथ झा द्वारा किया गया. इस अवसर पर सामूहिक भोज का आयोजन किया गया. आयोजन को सफल बनाने में बिनय कुमार झा, जयंत कुमार झा, संतोष कुमार मिश्र, बदरीनाथ झा, नरेश झा, प्रेमचंद्र झा, भारतेंदु कुमार झा, नंद किशोर महतो, ब्रज कुमार झा, राज कुमार मिश्र, कौशल किशोर झा, मोहन झा परोसी, संतोष कुमार झा, दया शंकर चौधरी, अभय कुमार झा, मकर चौधरी, नारायण तिवारी, बबिता झा, बिट्टू झा, सुनीता झा, अनिता झा, रेनू झा, नमीता मिश्रा और मंजू झा आदि का योगदान रहा.

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Author: Raj Kumar

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