भारतीय ज्ञान परंपरा से होगा टिकाऊ विकास : डॉ मयंक मुरारी

भारतीय ज्ञान परंपरा, ग्रामीण विकास के लिए एक समग्र और सतत दृष्टिकोण प्रदान करती है.

इस्कॉन के साथ उषा मार्टिन का ग्रामीण विकास की पहल

रांची. भारतीय ज्ञान परंपरा, ग्रामीण विकास के लिए एक समग्र और सतत दृष्टिकोण प्रदान करती है. यह प्रकृति आधारित समाधानों, सामुदायिक सशक्तीकरण, स्वदेशी कृषि तकनीकों को बढ़ावा देती है. यह बातें चिंतक और उषा मार्टिन के ग्रामीण विकास विभाग के हेड डॉ मयंक मुरारी ने कही. वे रविवार को सेंसर गांव में उषा मार्टिन फाउंडेशन और इस्कॉन के साथ गांवों में विकास अभियान के शुरुआत के अवसर पर बोल रहे थे. इस अभियान के तहत आधा दर्जन गांवों में परिवार मूल्य, भारतीय जीवन परंपरा, शराबबंदी, जैविक खेती आदि विषयों पर कार्य किये जायेंगे. डाॅ मुरारी ने कहा कि आत्मनिर्भर गांव में सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षित होता है, जो वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे मूल्यों के साथ आधुनिक विकास लक्ष्यों को जोड़ता है. इस्कॉन रांची ने ग्रामीण गृहस्थों के लिए एक भारतीय ज्ञान प्रणाली कार्यक्रम का आयोजन किया. गांवों में वैदिक सभ्यता की खेती पर परम प्रकाश श्यामसुंदर प्रभु का प्रवचन शामिल था. सुधीर कृष्ण चैतन्य दास ने बताया कि उनका कार्य ग्रामीण समुदायों के ज्ञान और संस्कृति को सम्मान देना है, जिससे समग्र विकास संभव हो सके. कार्यक्रम का समापन आनंदमय कीर्तन और स्वादिष्ट प्रसादम के साथ हुआ. इस अवसर पर साची कुमार दास, अद्वैत दास, अभय कुमार, अनुराग इंद्रगुरु, स्वास्तिक साहा और कंपनी के वरुण कुमार, भुनेश्वर महतो और हेसल, उलातु, बसेरा और लुपुंग के ग्रामीण उपस्थित थे.

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