स्वास्थ्य मंत्री के पीत पत्र पर राज्य सरकार पक्ष रखे : हाइकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने रिम्स में मरीजों के बेहतर इलाज और बुनियादी सुविधाओं को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की.

रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने रिम्स में मरीजों के बेहतर इलाज और बुनियादी सुविधाओं को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान रिम्स के शपथ पत्र को देखा. शपथ पत्र में दिये गये स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के उस पीत पत्र को गंभीरता से लिया, जिसमें कहा गया है कि उनकी पूर्व स्वीकृति और अनुमति के बिना रिम्स किसी भी चिकित्सा उपकरण की खरीद नहीं करेगा. खंडपीठ ने राज्य सरकार को मंत्री के इस पत्र को लेकर पक्ष रखने का निर्देश दिया. वहीं खंडपीठ ने रिम्स के अधिवक्ता को मौखिक के बदले लिखित में सुझाव देने को कहा. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 13 अगस्त की तिथि निर्धारित की. मामले की सुनवाई के दौरान रिम्स निदेशक प्रो (डॉ) राजकुमार सशरीर उपस्थित थे. इससे पूर्व रिम्स निदेशक की ओर से शपथ पत्र दायर किया गया. निदेशक डॉ राजकुमार की ओर से रिम्स की स्थिति से अवगत कराते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी द्वारा जारी एक पीत पत्र को लगाया गया है, जिसमें मंत्री ने निर्देश दिया है कि उनकी पूर्व स्वीकृति व अनुमति के बिना रिम्स किसी भी चिकित्सा उपकरण की खरीद नहीं करेगा. खंडपीठ को यह भी बताया गया कि मंत्री के इस पत्र में रिम्स को किसी भी बड़े सिविल निर्माण कार्य की पहल करने से भी रोक दिया गया है. रिम्स ने कई महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण खरीदने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, जो अब अंतिम चरण में है. वहीं प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार दुबे ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि रिम्स में इलाज की दयनीय स्थिति को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. साथ ही प्रार्थी ज्योति शर्मा की ओर से भी जनहित याचिका दायर कर रिम्स की व्यवस्था बेहतर बनाने की मांग की गयी है. दोनों जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है.

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Published by: Praveen

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