रांची. केंद्र सरकार पर टैक्स और कोयले को लेकर हमलावर झारखंड सरकार पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि केंद्र पर बेबुनियाद आरोप लगाने से पहले राज्य सरकार भारी-भरकम टैक्स, सेस और धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन पर जवाब दे.
श्री सेठ ने तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि झारखंड में कोयले का मूल मूल्य लगभग 1221 रुपये प्रति टन है. हालांकि राज्य सरकार के भारी-भरकम करों और शुल्कों के कारण इसकी बिक्री कीमत 2458.78 रुपये प्रति टन तक पहुंच जाती है. वहीं, पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में यह 1741.22 रुपये और ओडिशा में 1708.48 रुपये प्रति टन है.
यानी झारखंड का कोयला अन्य राज्यों की तुलना में 700 से 750 रुपये महंगा बिक रहा है. मिनरल सेस, मैनेजमेंट फीस और अन्य करों का अतिरिक्त बोझ यहां के कोयले को गैर-प्रतिस्पर्धी बना रहा है. रक्षा राज्य मंत्री ने अवैध खनन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक तरफ भारी टैक्स से वैध कोयला महंगा है, वहीं बाजार में सरकारी दर से सस्ता अवैध कोयला आसानी से उपलब्ध है.
ऐसे में उद्योगपति महंगा कोयला क्यों खरीदेंगे? सरकार पहले अवैध उत्खनन पर प्रभावी रोक लगाये. कहा कि मोदी सरकार ने जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के तहत झारखंड को स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल व बुनियादी ढांचे के विकास के लिए करीब 19 हजार करोड़ रुपये दिये. लेकिन इस राशि के उपयोग में भारी अनिमियतताएं और बंदरबांट हुई है, जिसकी जांच जारी है. राज्य सरकार आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर टैक्स व्यवस्था की समीक्षा करे.
