रांची. राख बुधवार के साथ मसीही विश्वासियों का चालीसा काल प्रारंभ हो गया है. पुरुलिया रोड स्थित संत मरिया महागिरजाघर में आयोजित विशेष आराधना की अगुवाई आर्चबिशप विसेंट आईंद ने की. उन्होंने विश्वासियों के माथे पर राख का टीका लगाया. राख का टीका जीवन की क्षणभंगुरता का प्रतीक है. कैथोलिक विश्वास के अनुसार प्रत्येक वर्ष विश्वासी राख बुधवार के दिन से चालीसा काल में प्रवेश करते हैं. चूंकि वे इस दिन अपने माथे पर राख का टीका लगाते हैं, इसलिए इसे राखबुध के नाम से जाना जाता है. आर्चबिशप ने कहा कि चालीसा काल सिर्फ दिखावा करने का समय न रहे. जैसे बसंत के दौरान सभी पेड़ अपने पत्ते झाड़ देते हैं और इसके बाद उनमें नये पत्ते आते हैं, वैसे ही चालीसा काल में हमें खुद को नया बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि शारीरिक जीवन क्षण भंगुर है, इसलिए यह समय अनंत जीवन के लिए तैयारी करने का विशेष अवसर है.
अन्य गिरजाघरों में भी हुई आराधना
मेन रोड स्थित क्राइस्ट चर्च, बहुबाजार स्थित संत पॉल्स कैथेड्रल, ऑल सेंट्स चर्च, होली एंजिल्स चर्च कोकर, ख्रीस्त राजा चर्च कांके सहित अन्य चर्चों में भी राख बुधवार की आराधना हुई. जीइएच चर्च की पहली आराधना सुबह 6:30 बजे हुई. इसमें रेव्ह ममता बिलुंग ने आराधना का संचालन किया, जबकि उपदेश रेव्ह जॉर्ज केरकेट्टा ने दिया. शाम 5:30 बजे की आराधना का संचालन रेव्ह निशांत गुड़िया ने किया. वहीं उपदेश बिशप सीमांत तिर्की ने दिया. इस वर्ष ख्रीस्त विश्वासी 13 अप्रैल को खजूर रविवार या पाम संडे को पवित्र सप्ताह में प्रवेश करेंगे. 17 अप्रैल को पुण्य बृहस्पतिवार का दिन होगा. 18 अप्रैल को गुड फ्राइडे मनाया जायेगा. 20 अप्रैल को ईस्टर की आराधना होगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
