रांची: खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सोना सोबरन धोती-साड़ी वितरण योजना के तहत धोती, साड़ी और लूंगी की आपूर्ति की शर्तों में संशोधन किया है. इसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.32 करोड़ पीस धोती-साडी-लूंगी की खरीद होनी है. विभाग ने शुद्धिपत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि अब इस आपूर्ति के लिए केवल कंपनियां ही नहीं, बल्कि अन्य व्यावसायिक इकाइयां भी पात्र होंगी.
साथ ही जेम पोर्टल पर बिड जमा करने की अंतिम तिथि को भी बढ़ा दिया गया है. विभाग ने सरकारी संस्थान और कंपनियों की अनिवार्यता खत्म कर दिया है. पहले इस योजना के तहत केवल कंपनी अधिनियम 1956 के तहत पंजीकृत प्राइवेट लिमिटेड, लिमिटेड, पब्लिक लिमिटेड कंपनियों या सरकारी/अर्ध-सरकारी संस्थानों को ही पात्र माना जाता था.
अब नियमों में संशोधन करते हुए न्यूनतम पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले किसी भी व्यक्तिगत आवेदक, पार्टनरशिप फर्म, सोसाइटी, ट्रस्ट या कंपनी को योग्य बना दिया गया है. नये नियमों के तहत कई संस्थाओं को मौका दिया गया है, लेकिन बिडर को एक एकल इकाई होना अनिवार्य है. किसी भी प्रकार के कंसोर्टियम या ज्वाइंट वेंचर की अनुमति नहीं दी जायेगी.
इसके अलावा व्यक्तिगत या पार्टनरशिप फर्म, सोसाइटी, ट्रस्ट या कंपनी के रूप में पंजीकरण/निगमन का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जरूरी होगा. इस आपूर्ति के लिए जेम पोर्टल पर बिड जमा करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई से बढ़ाकर अब 29 जुलाई कर दी गयी है. अन्य शर्तों के अनुसार आपूर्तिकर्ता के पास न्यूनतम 3,00,000 मीटर प्रतिदिन की प्रसंस्करण क्षमता होनी चाहिए.
इसके सत्यापन के लिए संबंधित राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वैध कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें स्पष्ट उत्पादन क्षमता का उल्लेख हो. साथ ही गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कताई, बुनाई और प्रोसेसिंग (ब्लीचिंग, डाइंग, प्रिंटिंग, फिनिशिंग) की इन-हाउस सुविधा एक ही पैन के तहत होनी चाहिए.
