क्या झारखंड में बन सकता है रीवा जैसा सोलर पावर प्लांट?

नीतीश प्रियदर्शी ने कहा कि झारखंड में भूमिअधिग्रहण को लेकर भी कई समस्याएं हैं, क्योंकि यहां जंगल क्षेत्र ज्यादा है. ऐसे में जंगलों को काटना उचित नहीं होगा. ऐसे में सरकार को भूमि अधिग्रहण करते वक्त यह देखना होगा कि जंगल ना कटें, बंजर भूमि पर सोलर प्लांट लगाना उचित होगा.

केंद्र सरकार ने 2030 तक 450 गीगावाट यानी 4.50 लाख मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन रिन्यूएबल एनर्जी के जरिये करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें सोलर एनर्जी का योगदान 280 गीगावाट (2.80 लाख मेगावाट) होगा.

यह एक बड़ा लक्ष्य है और अगर सरकार इसे पूरा कर पाती है तो यह उल्लेखनीय होगा. इस परिदृश्य में अगर हम झारखंड की बात करें तो हम पाते हैं कि यहां चुनौतियां बहुत ज्यादा हैं. हालांकि सरकार सौर ऊर्जा पर फोकस कर रही है, लेकिन धरातल पर कोई बड़ा प्रोजेक्ट अभी तक नजर नहीं आ रहा है. सौर ऊर्जा को लेकर सरकार कितनी गंभीर है और इस दिशा में क्या ठोस काम हो रहे हैं?

इस सवाल के जवाब में झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (जेरेडा) के कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि प्रदेश में सोलर थर्मल पावर प्लांट लगाने की योजना है और इसपर सहमति लगभग बन गयी है. हालांकि योजना को अभी मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन बहुत जल्द ही सरकार इस दिशा में ठोस निर्णय लेने वाली है. अगर प्रदेश में सोलर पावर प्लांट लगता है तो यह बड़ी उपलब्धि होगी और प्रदेश अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अहम योगदान कर पायेगा.

सोलर पावर प्लांट के लिए जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होगी वह है जमीन. देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क 1590 एकड़ में फैला है. ऐसे में अगर झारखंड में सोलर पार्क बनता है तो इतनी ही जमीन की जरूरत होगी. झारखंड में सोलर पावर प्लांट लगाने की योजना को पर्यावरणविद्‌ नीतीश प्रियदर्शी ने बेहतरीन योजना बताया. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के लिए बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत होगी. झारखंड एक पठारी राज्य है, ऐसे में यहां समतल जमीन नहीं मिलेगी. साथ ही यह भी देखना होगा कि धूप किन इलाकों में अच्छी मिलेगी.

नितीश प्रियदर्शी ने कहा कि झारखंड में भूमिअधिग्रहण को लेकर भी कई समस्याएं हैं, क्योंकि यहां जंगल क्षेत्र ज्यादा है. ऐसे में जंगलों को काटना उचित नहीं होगा. ऐसे में सरकार को भूमि अधिग्रहण करते वक्त यह देखना होगा कि जंगल ना कटें, बंजर भूमि पर सोलर प्लांट लगाना उचित होगा. साथ ही अगर वैसे माइंस इलाके में सोलर प्लांट लगाया जाये जहां खनन अब बंद हो चुका है तो वह बेहतरीन उपाय होगा.

झारखंड में श्रमिकों की कमी नहीं है, यहां से श्रमिक पलायन कर दूसरे राज्यों में जाते हैं. ऐसे में अगर उन्हें अपने घर में नौकरी मिलेगी तो यह उनके लिए बेहतरीन अवसर होगा.

देश के प्रमुख सोलर पावर प्लांट

देश में कुछ प्रमुख सोलर पार्क हैं भड़ला सोलर पार्क राजस्थान, पावागढ़ सोलर पार्क, कर्नाटक, कुरनूल अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क, आंध्र प्रदेश, एनपी कुंटा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क, आंध्रप्रदेश और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट.

पृथ्वी के लगातार बढ़ते तापमान ने जलवायु परिवर्तन में अहम भूमिका निभाई है और अगर बात 2021 की ही करें तो कहीं सूखा, कहीं बाढ़, तो कहीं बर्फ के पिघलने से सैकड़ों लोगों की जान गयी. जलवायु परिवर्तन की इस भयावहता को पहचान कर ही विश्व में पेरिस समझौते को लागू किया गया और एनर्जी ट्रांजिशन पर जोर दिया जा रहा है. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए ऊर्जा के अक्षय स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने की लगातार कोशिश हो रही है.

Posted By : Rajneesh Anand

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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