SIR का असर: झारखंड में 68,555 म्यूटेशन लंबित, जमीन के काम के लिए 66 दिन का इंतजार

राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के कारण अंचलों का नियमित कामकाज प्रभावित है. जमीन म्यूटेशन और अन्य प्रमाण पत्र बनाने के काम में देरी हो रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

रांची: राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के कारण अंचलों का नियमित कामकाज प्रभावित है. अंचल कार्यालयों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के निर्वाचन संबंधी कार्यों में लगाये जाने से जमीन के म्यूटेशन समेत अन्य प्रमाण पत्रों से जुड़े काम प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं. इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. जमीन के म्यूटेशन के अलावा जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

20 सितंबर तक राज्य के म्यूटेशन डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार कुल 25,84,447 म्यूटेशन के मामले दर्ज हुए हैं, इनमें 12,41,899 मामलों का निबटारा हो चुका है. जबकि 68,555 मामले अभी लंबित हैं. वहीं, 12,73,993 मामले खारिज किये गये हैं. यानी कुल मामलों में करीब 2.65 प्रतिवेदन मामले अभी लंबित हैं, जबकि करीब आधे आवेदन खारिज किये जा चुके हैं.

एक दिन में 363 नये मामले, 1014 का निबटारा

20 सितंबर के डैशबोर्ड के अनुसार एक दिन में 363 नये म्यूटेशन मामले दर्ज हुए, जबकि 1,014 मामलों का निबटारा किया गया. इसी अवधि में 436 मामले खारिज किये गये. राज्य में म्यूटेशन के निबटारे में औसतन 66 दिन लग रहे हैं.

प्रमाण पत्रों के लिए भी अंचल कार्यालय पर निर्भरता

अंचल स्तर पर म्यूटेशन के साथ जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र जारी करने का काम भी होता है. इन प्रमाण पत्रों की जरूरत विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति, सरकारी योजनाओं, नौकरी, दाखिला और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पड़ती है. एसआइआर के दौरान बड़ी संख्या में राजस्व कर्मियों और अंचल स्तर के कर्मियों की निर्वाचन कार्य में तैनाती से इन सेवाओं के प्रभावित होने की स्थिति में लोगों को अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ रहा है.

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लेखक के बारे में

By Vivek chandra

झारखंड में पिछले दो दशक से अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं. पत्रकारिता का ककहरा प्रसिद्ध पत्रकार और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश से सीखा है. सम सामयिक विषयों पर कई रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रही हैं.
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