प्रसिद्ध साहित्यकार श्रवण कुमार गोस्वामी का निधन, ‘जंगलतंत्रम’ उपन्यास ने दिलायी थी ख्याति

Shravan Kumar Goswami dies Renowned litterateur राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त रांची के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ श्रवण कुमार गोस्वामी का आज सुबह निधन हो गया. वे 84 वर्ष के थे. डॉ गोस्वामी काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद वे बिस्तर पर ही थे और साहित्यिक गतिविधियों से दूर हो गये थे.

रांची : राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त रांची के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ श्रवण कुमार गोस्वामी का आज सुबह निधन हो गया. वे 84 वर्ष के थे. डॉ गोस्वामी काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद वे बिस्तर पर ही थे और साहित्यिक गतिविधियों से दूर हो गये थे.

डॉ गोस्वामी रांची के डोरंडा कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे, हालांकि वे रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे. रांची विश्वविद्यालय में उनके द्वारा लिखी गयी नागपुरी व्याकरण की किताब पढ़ाई जाती थी. उनकी सबसे चर्चित रचना ‘जंगलतंत्रम’ है. यह उपन्यास काफी चर्चित रहा और इसने डॉ गोस्वामी की ख्याति पूरे देश में फैला दी. इसके अतिरिक्त ‘एक छोटी सी नगरी की लंबी कहानी’ नाम से उन्होंने रांची का का पूरा इतिहास लिखा था. जो बाद में ‘रांची तब और अब’ के नाम से पुस्तक रूप में प्रकाशित हुई थी. वे हिंदी और नागपुरी में लिखते थे. उन्हें राधाकृष्ण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

डॉ गोस्वामी के निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक है. उनकी दो बेटियां और एक पुत्र हैं. डॉ गोस्वामी की प्रमुख रचनाओं में जंगलतंत्रम, सेतु, भारत बनाम इंडिया, दर्पण झूठ ना बोले, राहु केतु,मेरे मरने केे बाद, चक्रव्यूह,एक टुकड़ा सच और आदमखोर शामिल है. उनका कहानी संग्रह जिस दीये में तेल नहीं काफी चर्चित रहा था. उन्होंने डॉ कामिल बुल्के स्मृति ग्रंथ और रामचरितमानस का मुंडारी अनुवाद का संपादन किया था.

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Author: Rajneesh Anand

Published by: Prabhat Khabar

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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