Sarna Dharma Code, रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनगणना 2027 में सरना धर्म कोड को अलग पहचान के रूप में शामिल करने की मांग उठाई है. इसे लेकर उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखा है.
दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए. वहां वे जनगणना में सरना धर्म कोड को शामिल करने की मांग केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रख सकते हैं. इस मुद्दे पर वह दिल्ली में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं से भी मुलाकात भी कर सकते हैं. सोमवार को पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने हैं. इसके बाद बननेवाले राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक कर सकते हैं. इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
आंकड़ों पर जताई चिंता
राष्ट्रपति, पीएम और राज्यपाल को लिखे गए पत्र में मुख्यमंत्री ने चिंता जताई है कि अलग सरना कोड नहीं होने से आदिवासी समाज से जुड़े सटीक आंकड़े सामने नहीं आ पाते हैं. मुख्यमंत्री ने कहा है कि विधानसभा से पहले ही प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जा चुका है. उन्होंने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए बताया कि अलग कोड नहीं होने पर भी 21 राज्यों के 50 लाख लोगों ने धर्म के कॉलम में सरना दर्ज कराया था. उन्होंने कहा कि डिजिटल जनगणना के इस दौर में अलग कोड देने से आंकड़ों का संकलन और अधिक सटीक होगा. मुख्यमंत्री ने पत्र में राष्ट्रपति से आदिवासी समाज के हित में हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई है. उन्होंने प्रधानमंत्री से उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार आदिवासियों के इस भावनात्मक जुड़ाव और राज्य की आकांक्षाओं का सम्मान करेगी. वहीं, हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को संविधान की पांचवीं अनुसूची का उल्लेख करते हुए आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी की याद दिलाई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जनगणना के अगले चरण में सरना धर्म कोड को लेकर सकारात्मक निर्णय लेगी.
जनगणना में सरना धर्म को अलग पहचान नहीं मिली
मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि झारखंड की पहचान यहां की आदिवासी संस्कृति, प्रकृति आधारित जीवनशैली और विशिष्ट धार्मिक परंपराओं से जुड़ी है. आदिवासी समाज की आस्था जल, जंगल और जमीन से गहराई से जुड़ी है, जिसे सरना धर्म के रूप में जाना जाता है. लेकिन अब तक जनगणना में इसकी अलग पहचान नहीं दी गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि संतुलित विकास के लिए तथ्य आधारित नीति बनाना जरूरी है.
लंबे समय से सरना कोड की मांग होती रही है
अलग सरना धर्म कोड की मांग झारखंड में दशकों पुरानी है. झारखंड बनने के बाद आदिवासी संगठनों ने लगातार आंदोलन, धरना और राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाकर अलग धर्म कोड की मांग की है. 2011 की जनगणना के दौरान अलग कोड नहीं होने पर बड़ी संख्या में लोगों ने अन्य धर्म के कॉलम में खुद को सरना लिखा था. 11 नवंबर 2020 को विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर केंद्र से जनगणना में अलग सरना धर्म कोड देने की मांग की थी. इसके लिए विधानसभा ने केंद्र को प्रस्ताव भी भेजा था. विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उसी समय प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था. विधानसभा से पारित प्रस्ताव फिलहाल केंद्र के पास विचाराधीन है.
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