सूख गये जरबेरा के पौधे, सिंचाई की नहीं है व्यवस्था

प्रखंड के चूरी दक्षिणी पंचायत अंतर्गत ग्राम होयर के प्रगतिशील किसान मनोज कुमार ने वर्ष 2025 में 20 डिसमिल जमीन में जरबेरा फूल की खेती शुरू की थी

प्रतिनिधि, खलारी.

खलारी प्रखंड में परंपरागत खेती की परिपार्टी बदल रही है. क्षेत्र के किसान अब आधुनिक कृषि और फूलों की खेती को अपनी आजीविका का सशक्त माध्यम बना रहे हैं. राज्य सरकार के सहयोग से मिट्टी की खुशबू के साथ अब फूलों की सुगंध किसानों के जीवन में आर्थिक स्वावलंबन की नयी इबारत लिख रही है. आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए किसान आधुनिक फसलों की खेती कर अपनी तकदीर संवारने में जुटे हैं. हालांकि, कोयलांचल क्षेत्र में खदानों के विस्तार और गिरते जलस्तर के कारण सिंचाई का संकट एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है.

पानी के अभाव में सूख रही जरबेरा के पौधे :

प्रखंड के चूरी दक्षिणी पंचायत अंतर्गत ग्राम होयर के प्रगतिशील किसान मनोज कुमार ने वर्ष 2025 में 20 डिसमिल जमीन में जरबेरा फूल की खेती शुरू की थी. इससे उन्हें मुनाफा भी होने लगा था. लेकिन सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण जरबेरा के पौधे सूखकर नष्ट होने लगे. मनोज ने बताया कि फसल सूखने से उन्हें करीब 80 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़़ा है. उन्होंने सीसीएल के सीएसआर या डीएमएफटी मद से डीप बोरिंग कराने की मांग की है. ताकि वे खेती जारी रख सकें.

खदानों में डीवाटरिंग व ब्लास्टिंग से सूख रहे जलस्रोत :

प्रखंड का आधा से अधिक इलाका सीसीएल क्षेत्र में आता है. कोयला खदानों में निरंतर होने वाली डीवाटरिंग और भारी ब्लास्टिंग के कारण भू-जल की प्राकृतिक परतें टूट रही हैं. जिससे आसपास के जलस्रोत तेजी से नीचे जा रहे हैं. वर्तमान में अनियंत्रित गहरे बोरवेल, वनों की कटाई और बढ़ते कंक्रीट के कारण वर्षा जल का जमीन में प्रवेश भी रुक गया है. जिससे खदानों के नजदीक स्थित कुएं और चापाकल समय से पहले दम तोड़ रहे हैं.

03 खलारी 01:-होयर में सूख रहे जरबेरा फूल का पौधा दिखाता किसान मनोज कुमार.

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By DINESH PANDEY

DINESH PANDEY is a contributor at Prabhat Khabar.

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