Jharkhand Malaria Statistics 2026, रांची, (विपिन की रिपोर्ट): झारखंड के पांच जिले- चाईबासा, सरायकेला, साहिबगंज, खूंटी और गोड्डा, वर्तमान में मलेरिया के प्रमुख ‘हॉटस्पॉट’ बने हुए हैं. इन पांच जिलों में राज्य के कुल मलेरिया मामलों का 50% से अधिक हिस्सा दर्ज किया गया है. इसमें पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 16,553 मामले दर्ज किए गए हैं और इसे राज्य का मलेरिया केंद्र माना जा रहा है. इसके अतिरिक्त गुमला, सिमडेगा, कोडरमा, लातेहार और लोहरदगा जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में भी संक्रमण का प्रभाव देखा गया है.
स्वास्थ्य विभाग का मानसून पूर्व मास्टर प्लान
आगामी मानसून को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए एक विशेष मास्टर प्लान तैयार किया है. इसके तहत बारिश के दौरान और उसके बाद जलभराव वाले इलाकों की पहचान की जाएगी ताकि मच्छरों के पनपने के अनुकूल वातावरण को नष्ट किया जा सके. साथ ही, उच्च संक्रमण वाले क्षेत्रों में स्क्रीनिंग बढ़ाई जाएगी और जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. राहत की बात यह है कि सर्विलेंस बढ़ने के कारण केस रिपोर्टिंग में सुधार हुआ है.
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राज्यभर में संक्रमण और मृत्यु के आंकड़े
पूरे राज्य में अब तक मलेरिया के कुल 42,236 मामले दर्ज किए गए हैं. संक्रमण की प्रकृति पर गौर करें तो ‘प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम’ (PF) मलेरिया के 30,545 मामले और ‘प्लास्मोडियम विवैक्स’ (PV) मलेरिया के 9,475 मामले सामने आए हैं. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, मलेरिया से अब तक दो मौतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से एक मामला धनबाद और दूसरा साहिबगंज जिले में रिकॉर्ड किया गया है.
राजधानी रांची की स्थिति
रांची जिले में वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों (जनवरी से मार्च) के दौरान स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर है. इस अवधि में कुल 34,673 ब्लड स्लाइड का संग्रह किया गया, जिनमें से केवल 08 मामले पॉजिटिव पाए गए हैं. इन पॉजिटिव मामलों में 04 प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम और 04 प्लास्मोडियम विवैक्स के संक्रमित शामिल हैं. रांची जिले में मलेरिया से अब तक किसी भी मृत्यु की सूचना नहीं है.
