आदिवासी महिलाओं के लिए आवाज बुलंद करेगा सखुआ, रांची में दो दिन तक होगा मंथन

आदिवासी समाज की महिलाओं की समस्याएं सामने ही नहीं आ रहीं. सर्वेक्षण के बाद हमें लगा कि इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए. इसलिए झारखंड की राजधानी रांची में एक सेमिनार के आयोजन का विचार आया. 19 और 20 अगस्त 2023 को दो दिवसीय एक सेमिनार करेंगे, जिसमें आदिवासी समाज से जुड़ी तमाम समस्याओं पर हम चर्चा करेंगे.

झारखंड में आदिवासी महिलाओं को घरेलू प्रतारणा झेलनी पड़ती है. इसकी वह कहीं शिकायत भी नहीं कर पाती. घुटती रहती है, लेकिन पुलिस के पास नहीं जा पाती. हिंसा सहने की जब उसकी क्षमता खत्म हो जाती है, तो उसे डायन बताकर मार दिया जाता है. ऐसे बहुत से मामले पुलिस तक नहीं पहुंच पाते. थाने में कोई प्राथमिकी दर्ज कराने तक नहीं जाता. नवंबर 2022 में सखुआ ने 5 जिलों के 15 गांवों में एक सर्वे किया, जिसके बाद इस तथ्य का पता चला. सखुआ की संस्थापक मोनिका मरांडी ने यह जानकारी दी.

सामने नहीं आतीं आदिवासी महिलाओं की बहुत सी समस्याएं

उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज की महिलाओं की समस्याएं सामने ही नहीं आ रहीं. इस सर्वेक्षण के बाद हमें लगा कि इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए. इसलिए झारखंड की राजधानी रांची में एक सेमिनार के आयोजन का विचार आया. 19 और 20 अगस्त 2023 को दो दिवसीय एक सेमिनार करेंगे, जिसमें आदिवासी समाज से जुड़ी तमाम समस्याओं पर हम चर्चा करेंगे. उन्होंने बताया कि इस सेमिनार का विषय ‘2023 में आदिवासी महिलाएं और उनकी समस्याएं और समाधान’ है.

एचआरडीसी हॉल में 19-20 अगस्त को होगा आयोजन

दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन जीईएल चर्च के पास सिरमटोली के गोस्सनर कम्पाउंड स्थित एचआरडीसी हॉल में किया गया है. इसमें आदिवासियों के पलायन से लेकर घरेलू काम करने वाले लोगों की परेशानियों पर भी चर्चा करेंगे. उनको इन परेशानियों से कैसे निजात मिल सके, उस पर भी चर्चा होगी. ऐसे लोगों को कानूनी परामर्श कैसे मिल सके, उस पर भी हम दो दिन तक रांची में मंथन करेंगे.

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कई राज्यों के लोग आयेंगे सेमिनार में

सखुआ की फाउंडर मोनिका मुंडा ने कहा कि इस सेमिनार में रांची के विभिन्न सामाजिक संगठनों के कर्यकर्ता, बुद्धिजीवी महिलाएं, पत्रकार, किसान महिलाएं, मजदूर महिलाओं के साथ-साथ राजनीति से जुड़ी महिलाएं भी शामिल होंगी. कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक चलेगा. उन्होंने बताया कि पहली बार आदिवासी समाज की एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग भी शामिल होंगे. सेमिनार में अन्य राज्यों से भी लोग शामिल होंगे.

जहां अब तक सर्वेक्षण हुआ

रांची जिला के नामकुम प्रखंड स्थित हिसलपीढ़ी, लेदनापीढ़ी, बुदरी, महुआ और घासीटोली. सिमडेगा जिले के सिमडेगा प्रखंड के बड़बड़पानी, गरजा, गुदगुदटोली, देवघर जिले के धमनी, बदबद, बरसतिया और चोरकट्टा, रामगढ़ जिले के धरधोरिया गांव, खूंटी जिले के खास खूंटी में सखुआ ने सर्वेक्षण किया और उसके आधार पर कुछ समस्याओं को चिह्नित किया है, जिस पर सेमिनार में चर्चा होगी.

सखुआ के सम्मेलन में ये लोग होंगे शामिल

झारखंड से गीताश्री उरांव, आलोका कुजूर, निर्मला पुतुल, वासवी किड़ो, पूनम टोप्पो, बासंती सरदार, ममता, कुंदरसी मुंडा, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से कुसुम ताई आलम, पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी से एलजीबीटीक्यू समुदाय की क्रिस्टी, ओडिशा के राउरकेला से मंजुला बारा और सिमडेगा की अगस्टिना बेग इस कार्यक्रम में विशष रूप से शिरकत करेंगी.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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