CM Hemant Soren, रांची (सुनील चौधरी): झारखंड की राजधानी रांची को आधुनिक और स्मार्ट सुविधाओं से लैस करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को रांची स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए गठित ‘हाई पावर कमेटी’ की बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्देश दिया कि परियोजना के क्रियान्वयन में आ रही सभी अड़चनों को अविलंब दूर कर काम को गति दी जाए. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि रांची का विकास केवल कंक्रीट का ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि नागरिक सुविधाओं का विस्तार और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना भी है.
पर्यावरण संरक्षण: विकास के साथ प्रकृति का तालमेल
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्देश दिया कि सभी विकास कार्यों के दौरान ‘पर्यावरण संरक्षण’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. उन्होंने अधिकारियों से दोटूक कहा कि किसी भी योजना के क्रियान्वयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि प्रकृति को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे. मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने और शहरी क्षेत्रों में हरियाली बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने पर बल दिया. उनके अनुसार, स्मार्ट सिटी का अर्थ केवल तकनीकी रूप से उन्नत होना नहीं, बल्कि रहने योग्य (Livable) होना भी है.
राजस्व सृजन और परिसंपत्तियों का प्रबंधन
स्मार्ट सिटी को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से बैठक में ई-ऑक्शन (e-Auction) एवं अन्य माध्यमों से राजस्व सृजन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपलब्ध भूमि और अन्य परिसंपत्तियों का समुचित एवं योजनाबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने विभागीय मास्टर प्लान की समीक्षा करते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के अंतर्गत आने वाली सभी योजनाएं व्यावहारिक और सीधे तौर पर जनहित से जुड़ी होनी चाहिए ताकि आम जनता को इनका लाभ मिल सके.
पर्यटन और तकनीक का संगम
बैठक में केवल बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि पर्यटन विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण योजनाओं की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री के समक्ष विभिन्न परियोजनाओं को ‘थ्री-डी (3D) एनीमेशन’ और वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित किया गया. मुख्यमंत्री ने पर्यटन स्थलों के समग्र विकास और उनकी आकर्षक प्रस्तुति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कई विभागों के सचिव उपस्थित थे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने संसाधनों के अधिकतम और प्रभावी उपयोग के लिए जवाबदेह बनाया.
