रांची : जीवन की एक सच्ची प्रेरणा और मानवीय संवेदनाओं को समेटे 'रन फॉर आशा' (Run for Asha) अभियान की शुरुआत 30 अगस्त 2026 से होने जा रही है. इस चैरिटी रन के तहत स्वीडन के धावक ब्योर्न स्वेन्सन और उनकी मित्र क्रिस्टीना पाल्टेन लद्दाख (लेह) से झारखंड के खूंटी जिले तक लगभग 2,600 किलोमीटर की दुर्गम दूरी दौड़कर तय करेंगे. लगभग तीन महीने तक चलने वाली इस असाधारण यात्रा का मुख्य उद्देश्य कठिन भौगोलिक चुनौतियों को पार करते हुए झारखंड के बच्चों और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए जनसहयोग जुटाना और समाज को जोड़ना है.
एक हादसे और भारतीय पोर्टर की इंसानियत से शुरू हुआ सफर
इस अभियान के पीछे एक भावुक कर देने वाली कहानी है. वर्ष 1994 में स्वीडन निवासी ब्योर्न स्वेन्सन जब हिमालयी क्षेत्र की यात्रा पर थे, तब एक गंभीर दुर्घटना में घायल हो गए थे. उस कठिन समय में तेनजिंग नाम के एक भारतीय पोर्टर ने ब्योर्न को अपनी पीठ पर लादकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया और उनकी जान बचाई. जब ब्योर्न ने आभार व्यक्त करते हुए पैसे देने चाहे, तो तेनजिंग ने यह कहकर मना कर दिया- "यह इसके बारे में नहीं है." तेनजिंग के इन शब्दों ने ब्योर्न के जीवन की दिशा बदल दी. कालांतर में ब्योर्न का जुड़ाव झारखंड के खूंटी जिले से हुआ, जहां उन्होंने बच्चों और स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के संकल्प के साथ 'आशा' (Asha) संस्था के कार्यों को आगे बढ़ाया.
चुनौतीपूर्ण होगा 2,600 किलोमीटर का यह सफर
ब्योर्न और क्रिस्टीना 30 अगस्त को लेह से अपनी दौड़ की शुरुआत करेंगे और नवंबर 2026 के अंत तक खूंटी पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है. जिसकी दूरी 2,600 किलोमीटर है. इस यात्रा के दौरान दोनों धावकों को लगभग 25,000 मीटर की कुल ऊंचाई चढ़नी होगी. शुरुआती 470 किलोमीटर का रास्ता समुद्र तल से 4,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर होगा, जबकि सबसे उच्चतम बिंदु 5,328 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.
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अनुभवी अल्ट्रा-मैराथन धावक हैं ब्योर्न और क्रिस्टीना
ब्योर्न स्वेन्सन लंबी दूरी और पहाड़ी दौड़ के सिद्धहस्त धावक हैं और वे 246 किमी की प्रसिद्ध 'अल्ट्रामैराथन' पूरी कर चुके हैं. वहीं, क्रिस्टीना पाल्टेन के नाम कई वैश्विक रिकॉर्ड दर्ज हैं, उन्होंने अकेले ईरान में 1,840 किमी तथा तुर्की से फिनलैंड तक 3,262 किमी की दौड़ सफलतापूर्वक पूरी की है.
बच्चों के खेल, शिक्षा और जीवन कौशल में मिलेगा सहयोग
'रन फॉर आशा' अभियान केवल एक व्यक्तिगत एथलेटिक रिकॉर्ड का प्रयास नहीं है, बल्कि झारखंड के जरूरतमंद बच्चों के सपनों को पंख देने की एक पहल है. इस दौड़ के जरिए जुटाए गए सहयोग और फंड का इस्तेमाल खूंटी व आसपास के बच्चों एवं युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल सुविधाओं, जीवन कौशल (Life Skills) और एक सुरक्षित माहौल तैयार करने में किया जाएगा. आयोजकों ने आम जनता, खेल प्रेमियों और समाजसेवियों से इस प्रेरणादायक यात्रा का हिस्सा बनने और बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में सहयोग की अपील की है.
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