Ranchi: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को झारखंड के आदिवासी समूहों के साथ बंद कमरे में बातचीत के दौरान विविधता में एकता के महत्व पर जोर दिया. इस मीटिंग के बाद उसमें शामिल एक शख्स ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भागवत ने कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समूहों के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों को सुना, जिनमें धर्मांतरण, पेसा नियमों में खामियां और सूची से नाम हटाना शामिल था. कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव की बेटी निशा उरांव ने पत्रकारों को बताया कि अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा और धर्म हमें विविधता में एकता सिखाते हैं. रास्ते भले ही अलग-अलग हों, लेकिन मंजिल एक ही है.
निशा उरांव ने भी पेशा कानून में गिनाई कमियां
उन्होंने आगे बताया कि भागवत ने कहा कि भारतीय धर्म हमें सिखाता है कि सभी अलग-अलग रास्ते सही हैं और उनमें से कोई भी गलत नहीं है. यही सनातन, हिंदू और भारतीय धर्म है. झारखंड में हाल ही में लागू किये गये पेसा नियमों में कथित खामियों के खिलाफ मुखर रहने वाली निशा उरांव ने कहा कि उन्होंने भागवत के साथ बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा, ‘मैंने उन्हें (भागवत को) बताया कि नियमों में प्रथागत कानूनों, सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाजों का कोई उल्लेख नहीं है, जो इस अधिनियम का मूल आधार हैं. इस खामी से आदिवासी समुदायों को भारी नुकसान होगा. यह आदिवासी लोगों के हित में नहीं है.’
कई बड़े भाजपा नेता भी थे मौजूद
अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के अधिकारों को मान्यता देने वाला पेसा अधिनियम 1996 में बना था. हालांकि, राज्य सरकार ने इस महीने की शुरुआत में पेसा नियमों को अधिसूचित किया. बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और चंपई सोरेन, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और अन्य आदिवासी नेताओं ने भाग लिया. झारखंड के दो दिवसीय दौरे पर आए भागवत ने शुक्रवार को आरएसएस के प्रदेश नेतृत्व से भी मुलाकात की थी.
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