नगर निगम की लापरवाही से 'सखुआ महोत्सव' पर ब्रेक: 1 लाख के लक्ष्य के मुकाबले एक माह में लगे सिर्फ 4,800 पौधे

रांची शहर को हरा-भरा बनाने के अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई है. एक लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 4,800 ही लगाए गए हैं. मॉनसून का समय बीत चुका है, लेकिन खरीद का टेंडर अब तक फाइनल नहीं हुआ है.

रांची से उत्तम महतो की रिपोर्ट

रांची. शहर को हरा-भरा बनाने के लिए शुरू किये गये सखुआ महोत्सव अभियान की रफ्तार एक माह में ही थम गयी है. नगर निगम ने शहर के सभी 53 वार्डों में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक सिर्फ 4,800 पौधे ही लगाये जा सके हैं. यानी तय लक्ष्य का महज 4.8 प्रतिशत. विडंबना यह है कि पौधरोपण के लिए सबसे अनुकूल मॉनसून का समय बीत गया, लेकिन निगम के पास पौधों की नियमित उपलब्धता के लिए खरीद का टेंडर अब तक फाइनल नहीं हुआ है.

8 अगस्त को राज्यपाल ने अभियान की थी शुरुआत

मेयर रोशनी खलखो की पहल पर 8 अगस्त को राज्यपाल संतोष गंगवार की अध्यक्षता में चुटिया स्थित इक्कीसो महादेव मंदिर से अभियान की शुरुआत हुई थी. अभियान के तहत एक माह में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया था. शुरुआत में शहर में बड़े पैमाने पर पौधरोपण को लेकर जोर-शोर से तैयारी दिखी, लेकिन एक माह बाद उपलब्धि लक्ष्य से काफी पीछे है.

पौधरोपण के लिए मॉनसून को सबसे अनुकूल समय माना जाता है, क्योंकि बारिश के कारण नये पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है. ऐसे समय में पौधों की खरीद प्रक्रिया पूरी नहीं होने से अभियान की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं. अब मॉनसून का अधिकांश समय बीत चुका है.

एक लाख पौधे लगाने का था लक्ष्य

ऐसे में लक्ष्य के बाकी 95,200 पौधे लगाये भी जाते हैं, तो उनके संरक्षण और नियमित सिंचाई की चुनौती सामने होगी. सवाल यह भी है कि जब एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य पहले से तय था. तो अभियान शुरू होने से पहले पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं की गयी.

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पौधे खरीदने का टेंडर ही नहीं हुआ फाइनल

पौधों की खरीद और आपूर्ति के लिए नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की, लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है. इसका सीधा असर पौधरोपण अभियान पर पड़ा. निगम के पास पर्याप्त संख्या में पौधे उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़े पैमाने पर पौधरोपण नहीं हो सका. हाल यह रहा कि अभियान के दौरान निगम को पौधों के लिए वन विभाग पर निर्भर रहना पड़ा. जरूरत के अनुसार वन विभाग से पौधों की मांग की जाती रही और पौधे मिलने के बाद उन्हें शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगाया गया.

अफसरों की लापरवाही से टेंडर फाइनल नहीं हुआ

मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि शहर को हरा-भरा रखने के लिए सखुआ महोत्सव की शुरुआत की गयी थी. अफसरों की लापरवाही के कारण अब तक पौधों की खरीद का टेंडर फाइनल नहीं हुआ है.

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By Prabhat khabar news desk

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