मोराबादी मैदान से राजीव पांडेय और प्रवीन मुंडा की रिपोर्ट
रांची. रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को आदिवासी एकता महाजुटान महारैली का आयोजन किया जा रहा है. रैली दिन के 11 बजे से शुरू होगी. प्रस्तावित परिसीमन का विरोध और आदिवासी अधिकारों की रक्षा इस महाजुटान का मुख्य उद्देश्य है. सुबह से ही मोरहाबादी मैदान में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है.
रैली की तैयारियों और व्यवस्था का जायजा लेने के लिए पूर्व विधायक बंधु तिर्की और केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की मोरहाबादी मैदान पहुंचे. दोनों ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्था में जो कमियां नजर आईं, उन्हें तत्काल दुरुस्त करने का निर्देश दिया.
विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना
महाजुटान में झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों के शामिल होने की संभावना है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की, दयामनी बरला, रमा खलखो, आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा, अजय तिर्की, शिवा कच्छप सहित कई अन्य नेता इसमें शामिल होंगे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा पक्ष और विपक्ष के सभी आदिवासी विधायकों व सांसदों को भी आमंत्रित किया गया है. मध्यप्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों के आदिवासी नेता भी महाजुटान में शामिल होंगे.
परिसीमन से आरक्षित सीटें घटने की आशंका
आयोजकों के अनुसार आगामी परिसीमन में आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या घटने की आशंका है. बंधु तिर्की ने कहा कि वर्ष 2006-07 में झारखंड में परिसीमन का जो प्रस्ताव सामने आया था, उसमें आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या घटने की आशंका थी. उस समय व्यापक विरोध के कारण झारखंड में परिसीमन नहीं हो सका था. इस बार भी इसी तरह की आशंका बनी हुई है.
ये भी पढ़ें: आदिवासी महाजुटान से पहले रांची में ट्रैफिक अलर्ट, 30 अगस्त को कई सड़कें रहेंगी बंद; जानें पार्किंग प्लान
झारखंड पांचवीं अनुसूची वाला राज्य
आयोजकों का कहना है कि झारखंड पांचवीं अनुसूची वाला राज्य है. ऐसे में यदि परिसीमन में सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या कम हो सकती है. महाजुटान के माध्यम से इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा.
ये भी पढ़ें: नेपाल त्रासदी पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने जताया दुख, कहा- संकट की घड़ी में भारत नेपाल के साथ
परिसीमन समेत कई मुद्दों पर पारित होंगे प्रस्ताव
आयोजकों के मुताबिक रैली में आदिवासी आरक्षित सीटें घटने के विरोध में प्रस्ताव पारित किया जाएगा. इसके अलावा पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून, केंद्र सरकार के हालिया खनन बिल, विस्थापन और पलायन समेत आदिवासी समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर वक्ता अपनी बात रखेंगे. आयोजकों ने इसे आदिवासी अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण महाजुटान बताया है.
