रांची से राजेश झा की रिपोर्ट
Ranchi HEC News, रांची : एचईसी (हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) आवासीय परिसर में आवंटित दुकानों के बकाया किराया और पानी के बिल के भुगतान के लिए भेजे जा रहे नोटिसों ने स्थानीय व्यापारियों की रातों की नींद उड़ा दी है. एचईसी प्रबंधन के इस कदम के खिलाफ दुकानदारों और जगन्नाथ नगर व्यवसायी महासंघ में गहरा आक्रोश व्याप्त है. व्यापारियों ने एचईसी प्रबंधन पर सीधे तौर पर मनमानी करने, गलत बिलिंग भेजने और डिले पेमेंट सरचार्ज (DPS) के नाम पर लाखों रुपये की अतिरिक्त और अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगाया है. व्यवसायियों का साफ कहना है कि जब तक प्रबंधन इन त्रुटिपूर्ण बिलों में सुधार नहीं करता और नियमों के विरुद्ध लगाए गए सरचार्ज को वापस नहीं लेता, तब तक तनाव कायम रहेगा.
कनेक्शन न होने पर भी लाखों का वाटर चार्ज
स्थानीय दुकानदारों ने एचईसी प्रबंधन की पोल खोलते हुए बताया कि परिसर की अधिकांश दुकानों में पानी का कोई वैध कनेक्शन है ही नहीं. जिन चुनिंदा दुकानों में कनेक्शन दिया भी गया है, वहां कभी पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं होती. सेक्टर-टू बाजार के व्यापारियों ने बताया कि एचईसी की ओर से नियमित जलापूर्ति ठप रहने के कारण कई व्यवसायियों ने आपस में पैसे मिलाकर अपने निजी खर्च पर बोरिंग करायी है और वर्षों से उसी पानी का उपयोग कर रहे हैं. इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा उन्हें लाखों रुपये के वाटर चार्ज का बिल थमा दिया गया है. बिलों की गड़बड़ी का आलम यह है कि एक दुकानदार को लगभग 11 लाख रुपये वाटर चार्ज और 8 लाख रुपये डीपीएस का बिल थमाया गया है, जबकि एक अन्य व्यवसायी को 6 लाख रुपये पानी शुल्क के साथ 7 लाख रुपये से अधिक का डीपीएस भुगतने का नोटिस मिला है.
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अधिसूचना की सरेआम धज्जियां
व्यवसायियों ने एचईसी प्रबंधन को घेरते हुए कहा कि 9 जनवरी 2024 को जारी आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया गया था कि पुराने बकाये पर किसी भी प्रकार का डिले पेमेंट सरचार्ज (DPS) नहीं लगाया जायेगा. इसके बावजूद हाल ही में जारी किए गए नए बिलों में नियमों को ताक पर रखकर भारी-भरकम डीपीएस जोड़ दिया गया है, जो सीधे तौर पर अधिसूचना का उल्लंघन है. व्यापारियों का कहना है कि एक तरफ तो उनके पास बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं और दूसरी तरफ इस तरह की दंडात्मक बिलिंग करके उनके व्यापार को ठप करने की साजिश रची जा रही है, जिससे पूरे बाजार क्षेत्र में डर और नाराजगी का माहौल है.
संशोधित बिल मिलने के बाद जमा होगा दुकानों का किराया
इस पूरे विवाद पर जगन्नाथ नगर व्यवसायी महासंघ के महासचिव हरेंद्र प्रसाद ने प्रबंधन की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि प्रबंधन द्वारा भेजे जा रहे बिलों में तकनीकी और व्यावहारिक रूप से कई बड़ी कमियां हैं, जिनसे महासंघ ने कई बार एचइसी के अधिकारियों को अवगत कराया है. हर बार प्रबंधन ने समय और मैनपावर (कर्मचारियों) की कमी का रोना रोते हुए जल्द सुधार करने का खोखला आश्वासन दिया, लेकिन आज तक डीपीएस हटाकर कोई संशोधित बिल जारी नहीं किया गया. महासंघ ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जब तक सभी बिलों की गहन जांच कर गलत पानी शुल्क और डीपीएस नहीं हटाया जाता, तब तक दुकानदार किराया जमा नहीं करेंगे. महासंघ ने मांग की है कि जांच के बाद संशोधित बिल की एक प्रति संघ को सौंपी जाए, जिसके बाद ही सभी दुकानदार विधिवत किराया जमा करेंगे.
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