Ranchi Khadgarha Bus Stand Tender : झारखंड की राजधानी रांची के कांटाटोली स्थित खादगढ़ा बस स्टैंड की बंदोबस्ती में रांची नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में है. पहली ऑनलाइन बिडिंग में जहां बस स्टैंड के संचालन के लिए अधिकतम बोली 7.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी थी, वहीं नगर निगम ने प्रक्रिया को बीच में ही रद्द कर दिया. इसके करीब तीन सप्ताह बाद दोबारा हुई बिडिंग में अधिकतम बोली महज तीन करोड़ 20 लाख 80 हजार रुपये रही. यानी पहली और दूसरी बिडिंग की अधिकतम बोली में करीब 4.29 करोड़ रुपये का अंतर रहा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पहली प्रक्रिया में 7.5 करोड़ रुपये की बोली मिल चुकी थी, तो उसे रद्द करने के बाद निगम ने दोबारा ऐसी प्रक्रिया क्यों अपनायी, जिसमें बंदोबस्ती रिजर्व प्राइस से महज 80 हजार रुपये अधिक पर पूरी हो गयी.
23 दिन में बस स्टैंड का भाव गिर गया
खादगढ़ा बस स्टैंड के संचालन के लिए पहली बार आठ अगस्त को एमएसटीसी के माध्यम से ऑनलाइन बिडिंग हुई थी. बोली रात करीब 2:00 बजे तक चली. इसमें आहाब इंटरप्राइजेज ने करीब 7.5 करोड़ रुपये की सबसे अधिक बोली लगायी और एल-1 रही. हालांकि, बिडिंग पूरी होने से पहले ही नगर निगम ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी. एक सितंबर को निगम ने दोबारा ऑनलाइन बिडिंग करायी. इस बार अधिकतम बोली तीन करोड़ 20 लाख 80 हजार रुपये तक ही पहुंची. बस स्टैंड का रिजर्व प्राइस 3.2 करोड़ रुपये निर्धारित था. यानी अधिकतम बोली रिजर्व प्राइस से सिर्फ 80 हजार रुपये अधिक रही. आहाब इंटरप्राइजेज ने भी दूसरी प्रक्रिया में हिस्सा लिया, अधिक राशि की बोली नहीं लगायी.
पहली और दूसरी बोली में ₹4.29 करोड़ का अंतर
दोनों बिडिंग की अधिकतम बोली में करीब 4.29 करोड़ रुपये का अंतर है. पहली बार 7.5 करोड़ रुपये की बोली को आधार माना जाता, तो नगर निगम को इससे काफी अधिक राजस्व प्राप्त हो सकता था. दूसरी ओर, दूसरी बिडिंग में बंदोबस्ती 3.2 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइस के आसपास ही पूरी हो गयी.
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जीएसटी मद में भी सरकार को कम राजस्व मिलेगा
पहली बिडिंग में 7.5 करोड़ की बोली के आधार पर जीएसटी से करीब 1.5 करोड़ रुपये मिलने अनुमान था. वहीं, तीन करोड़ 20 लाख 80 हजार रुपये की बंदोबस्ती होने से जीएसटी की राशि भी स्वाभाविक रूप से कम होगी. यानी पहली और दूसरी बोली के बीच अंतर का असर सरकार को मिलनेवाले राजस्व पर भी पड़ेगा.
प्रभात खबर सवाल
सवाल यह है कि पहली ऑनलाइन बिडिंग में 7.5 करोड़ रुपये की अधिकतम बोली आने के बावजूद उसे किस ठोस प्रशासनिक आधार पर रद्द किया गया? क्या पहली बिडिंग में कोई तकनीकी या नियम संबंधी खामी थी? अगर थी, तो उसे बिडिंग के बाद दूर करने के बजाय पूरी प्रक्रिया रद्द करने की जरूरत क्यों पड़ी? और सबसे अहम, क्या दूसरी बिडिंग कराने से पहले रांची नगर निगम ने यह आकलन किया था कि इससे संभावित राजस्व पर क्या असर पड़ेगा?
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