Raghubar Das Exclusive Interview: क्या गैर-आदिवासी CM की वजह से झारखंड में हारी BJP? हेमंत सोरेन की राजनीति पर खुलकर बोले रघुवर दास

क्या गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री होने की वजह से BJP को सत्ता गंवानी पड़ी? झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास ने प्रभात खबर को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में इस और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की. MMDR बिल, अवैध खनन और हेमंत सरकार पर उनके तीखे जवाब जानें.


रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

Raghubar Das Exclusive Interview: क्या गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री होने की वजह से 2019 में बीजेपी को झारखंड की सत्ता गंवानी पड़ी? इस सवाल पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रभात खबर डिजिटल के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बेबाक जवाब दिया. उन्होंने 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार, आदिवासी वोटरों के रुख और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी. इस खास बातचीत में रघुवर दास ने JPSC परीक्षा विवाद, एग्जाम रिफॉर्म, पेपर लीक के आरोप, खनन और MMDR बिल, आदिवासी अधिकारों और झारखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने हेमंत सोरेन के साथ-साथ जयराम महतो के बयानों और बीजेपी की चुनावी रणनीति से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिए.

गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री वाला सवाल खारिज

इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री होने की वजह से आदिवासी समाज बीजेपी से दूर हो गया, तो उन्होंने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि संविधान में मुख्यमंत्री बनने के लिए किसी जाति का बंधन नहीं है. कोई भी भारतीय नागरिक मुख्यमंत्री बन सकता है.

MMDR बिल का बचाव और हेमंत सरकार पर हमला

उन्होंने केंद्र सरकार के खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन (MMDR) विधेयक का जोरदार बचाव करते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक झारखंड के हितों के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य की खनिज संपदा का अधिकतम लाभ दिलाने और खनन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में राज्य का संचालन "सिंडिकेट" के हाथों में है, जिससे जनता का भरोसा उठ चुका है.

MMDR बिल से निवेश और रोजगार बढ़ेगा

रघुवर दास ने कहा कि राज्य सरकार जिस अतिरिक्त सेस का समर्थन कर रही है, उससे झारखंड में खनिज आधारित उद्योगों की लागत बढ़ेगी और निवेशक पड़ोसी राज्यों ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ का रुख करेंगे. उनके अनुसार झारखंड में कोयला और लौह अयस्क महंगा होने से बिजली उत्पादन और इस्पात उद्योग पर भी असर पड़ता है. उन्होंने दावा किया कि पड़ोसी राज्यों में खनिजों की कीमत कम होने के कारण उद्योगों को वहां प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आवंटित 34 कोल ब्लॉकों में केवल चार ही संचालित हैं. यदि बाकी ब्लॉकों का संचालन शुरू होता तो राज्य को रॉयल्टी, प्रीमियम और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का लाभ मिलता.

अवैध खनन और DMF में घोटालों का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में कोयला, पत्थर, बालू, शराब और नियुक्ति तक में सिंडिकेट सक्रिय है. उन्होंने कहा कि DMF की राशि का बोकारो और चाईबासा जैसे जिलों में दुरुपयोग हुआ है. उनका दावा है कि राज्य सरकार के पास अभी भी हजारों करोड़ रुपये की DMF राशि पड़ी हुई है, जबकि इसका उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में होना चाहिए था.

छात्रों के आंदोलन पर सरकार को घेरा

रघुवर दास ने हालिया छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड के युवाओं ने शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन किया, लेकिन सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों पर कार्रवाई की गई, जबकि हिंसा करने वालों पर सख्ती नहीं हुई. उनका कहना था कि इतिहास गवाह है कि छात्र आंदोलनों से बदलाव आता है और युवाओं की आवाज को दबाने से समस्या खत्म नहीं होगी.

आदिवासी अधिकारों पर दिया जवाब

भाजपा से आदिवासी समाज के दूर होने के सवाल पर रघुवर दास ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के लिए संविधान में किसी जाति का बंधन नहीं है. उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, बिजली और रोजगार के क्षेत्र में बड़े काम हुए. उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में विशेष व्यवस्था की गई थी और आदिम जनजातियों के संरक्षण के लिए दो पुलिस बटालियन बनाई गई थीं. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के लिए "जल, जंगल और जमीन" केवल नारा नहीं, बल्कि विरासत है, जबकि विपक्ष इन मुद्दों का इस्तेमाल केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए करता है.

अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं

रघुवर दास ने कहा कि उनकी सरकार ने बिना भेदभाव के सभी वर्गों के लिए काम किया. उन्होंने हज हाउस निर्माण, विधानसभा और हाईकोर्ट भवन, ग्रामीण सड़कों का विस्तार, पहाड़ी इलाकों में बिजली पहुंचाने और हजारों सरकारी नियुक्तियों को अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां बताया. उन्होंने दावा किया कि पांच वर्षों में उनकी सरकार पर नियुक्तियों या प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कोई बड़ा आरोप नहीं लगा.

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जयराम महतो पर क्या बोले?

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता जयराम महतो पर पूछे गए सवाल के जवाब में रघुवर दास ने कहा कि युवाओं में जोश होना स्वाभाविक है, लेकिन उसके साथ होश भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को ऐसी भाषा से बचना चाहिए, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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