राढ़ू नदी पर बने पुल के बीच का हिस्सा धंसा, जान जोखिम में डाल कर आवागमन रहे हैं लोग

सिल्ली में लगातार बारिश के कारण राढ़ू नदी का पुल बीच से धंस गया है। पुल के टेढ़े होने के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। प्रशासन से जांच की मांग।

विष्णु गिरि

सिल्ली. बीते दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण सिल्ली प्रखंड में राढ़ू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. पतराहातू से तेतला बड़ाइक टांड़ जाने वाले मार्ग पर नदी पर 10 साल पहले बने उच्चस्तरीय पुल बहने के कगार पर पहुंच गया है. 18 पिलर वाले इस पुल का बीच का हिस्सा बुरी तरह धंस गया है.

पुल के बह जाने की आशंका

पुल और पानी की सतह के बीच अब करीब पांच से सात फीट की ही दूरी बची है. नदी का जलस्तर और बारिश की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो पुल के बह जाने की आशंका है. मंगलवार को पुल पर आवागमन सामान्य रूप से जारी रहा. पुल के टेढ़े होने की जानकारी मिलने के बाद शाम को ग्रामीणों की भीड़ वहां जुट गयी. इसके बावजूद कुछ लोग जान जोखिम में डालकर पुल पार करते रहे, जबकि कई ग्रामीणों ने आवागमन के लिए वैकल्पिक रास्ते का सहारा लिया.

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बीच से टेढ़ा हुआ पुल

ग्रामीणों के अनुसार, पुल की ऊपरी सतह पर हल्के धंसाव की जानकारी पहले ही संबंधित विभाग को दी जा चुकी है. इसके बावजूद पुल की मरम्मत अथवा आवागमन रोकने की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. ग्रामीणों ने बताया कि पुल के समीप से बालू का भी उठाव किया जाता है. उनका कहना है कि लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच पुल की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पुल का निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है.

पुल धंसने के कगार पर, बीच से टेढ़ा हो गया है, लोगों की भीड़, लगभग एक फीट का गैप बना | Prabhat Khabar Network
पुल धंसने के कगार पर, बीच से टेढ़ा हो गया है, लोगों की भीड़, लगभग एक फीट का गैप बना | Prabhat Khabar Network


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By Vishnu Giri

मैं मई 1998 से प्रभात खबर में पत्रकारिता कर रहा हूं. सबसे पहले मैने सिटी ऑफिस में फोटो पत्रकारिता से शुरुआत की. तीन सालों तक करने के बाद मैं सिल्ली से खबरें लिखने लगा. इस दौरान ग्रामीण क्षेत्र की हर प्रकार की खबरें लिखी. नियमित रूटीन खबरों के अलावे क्षेत्र की समस्याओं की खबरें, ग्रामीण प्रतिभा पर स्टोरी सहित जनसरोकार की पत्रकारिता से पहचान बनाई. इलाके में सामाजिक कुरीतियों, जाति पाति के भेदभावों वाले समाजिक बुराइयों पर भी स्टोरी किए. अभी करीब दो साल पहले प्रभात खबर ने में छपी एक छुआछूत एवं जाति पाति के भेदभाव की खबर को झारखंड, विहार एवं बंगाल में सर्वश्रेष्ठ स्टोरी का भी सम्मान मिला है. नियमित पत्रकारिता के साथ समय निकालकर शॉर्ट फिल्में और डॉक्यूमेंट्री भी बनाया करता हूं. मेरी बनाई डॉक्यूमेंट्री फिल्म " माटी के सपूत" को 61 वें राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई थी. अपने केटेगरी की सूची में फिल्म 89 वें नंबर पर रही थी. मैने इग्नू से पत्रकारिता, रेडियो प्रसारण डिप्लोमा एवं मारवाड़ी कालेज से फिल्म निर्माण में का भी डिप्लोमा का कोर्स किया है.

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