Ranchi News : निजी अस्पतालों को मरीज के इलाज की लेनी होगी पूरी जिम्मेदारी : स्वास्थ्य मंत्री

– स्वास्थ्य विभाग की आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना पर कार्यशाला

रांची.

राज्य में सरकारी अस्पतालों की तर्ज पर निजी अस्पतालों को भी मरीज के इलाज की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी. मैं स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना चाहता हूं, एक डॉक्टर होने के नाते हर हाल में आपकी मदद करूंगा. उक्त बातें स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने मंगलवार को आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत आयोजित कार्यशाला कही. मौके पर कई निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.

विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति जल्द

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि निजी अस्पताल जब तक आयुष्मान योजना एवं अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का पैसा रहता है, तब तक तो मरीज का इलाज करते हैं, इसके बाद उन्हें रेफर कर देते हैं. यह स्थिति अमानवीय है और अस्पतालों को मरीज के इलाज की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए. उन्होंने मौजूद प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि मैं स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना चाहता हूं, अगर कोई समस्या हो तो आप सीधे मुझसे बात कर सकते हैं. उन्होंने निचले क्रम में मानव संसाधन के साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति जल्द करने की बात कही. कार्यशाला में सभी जिलों के सिविल सर्जन के साथ शहरी क्षेत्र के 50 बेड से कम अस्पताल एवं ग्रामीण क्षेत्र के 30 बेड से कम अस्पताल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

राज्य में स्वास्थ्य सूचकांक बेहतर

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्वास्थ्य सूचकांक के बेहतर होने के संकेत दिये. उन्होंने राज्य में मातृ मृत्यु दर और बाल मृत्यु दर में आने वाली कमी का जिक्र किया. साथ ही अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य के लोग भी हमारे राज्य में इलाज के लिए आ रहे हैं. हमारे राज्य में 31,000 बेड हैं, जिनमें से सरकारी अस्पतालों में 15,500 के आसपास बेड हैं. यही हाल निजी अस्पतालों का भी है. उन्होंने कहा कि राज्य में नियमानुसार 1,13,000 बेड होने चाहिए.

प्राइवेट अस्पतालों से गाइडलाइन का अनुपालन करने का आग्रह

झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक अबु इमरान ने सभी प्राइवेट अस्पतालों से गाइडलाइन का सौ प्रतिशत अनुपालन करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि छोटे अस्पताल गाइडलाइन को नहीं समझ पा रहे हैं. उनके पास कर्मचारी भी ट्रेंड नहीं हैं. इसलिए उन्हें ऐसे लोगों की जरूरत है, जो ट्रेंड हों और गाइडलाइन को समझ सकें. उन्होंने सभी अस्पतालों से राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना और वय वंदन योजना के तहत भी इनरोल करने पर जोर दिया. अस्पतालों को अपडेट कैपेसिटी और शिकायत निवारण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया.

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Published by: Rajiv kumar

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