रांची में यमदूत बने खुले नाले, निगम की लापरवाही से जा रही मासूमों की जान

Ranchi News: रांची में खुले नाले लगातार हादसों का कारण बन रहे हैं. नगर निगम की लापरवाही के चलते कई मासूम और राहगीर जान गंवा चुके हैं. बरसात में हालात और खतरनाक हो जाते हैं, लेकिन नालों को ढंकने और सुरक्षा इंतजाम करने का काम अब भी अधूरा पड़ा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से उत्तम कुमार की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में खुले नाले लगातार लोगों की जान ले रहे हैं, लेकिन नगर निगम अब तक इन नालों को सुरक्षित बनाने में विफल साबित हुआ है. हर साल बरसात में निगम की ओर से लोगों को सतर्क रहने की अपील जारी की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर खुले नालों को ढंकने व रेलिंग लगाने का काम अधूरा ही रह जाता है. सुरक्षा के नाम पर नगर निगम केवल साइन बोर्ड लगवा देता है कि यह नाला खुला हुआ है, कृपया सावधानी से गुजरें. जबकि इन नालों में गिरकर अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है. वर्ष 2018 में नाला रोड के खुले नाले में फलक नामक बच्ची गिर गयी थी. तेज बारिश के कारण बच्ची को तुरंत खोजा गया, लेकिन वह नहीं मिली. दूसरे दिन बच्ची का शव नामकुम स्वर्णरेखा में मिला. आज यहां नाली का निर्माण दोबारा किया जा रहा है, लेकिन कछुए की गति से इसका निर्माण हो रहा है. ऐसे में इस वर्ष भी बरसात के दिनों में यहां हादसा हो सकता है.

खुले नाले में बहा युवक, बॉडी तक नहीं मिली

सात सितंबर 2020 को कोकर खोरहा टोली पुल के ऊपर से हजारीबाग का युवक उमेश राणा बाइक समेत बह गया. काफी दिनों तक खोजबीन के बाद भी युवक का शव नहीं मिला. युवक के बहने के बाद जिला प्रशासन से लेकर नगर निगम के अफसर यहां पहुंचे. अभियंताओं ने जांच कर बताया कि पुल काफी नीचे है. इसे तोड़ कर थोड़ा ऊंचा पुल बनाना होगा. पुल निर्माण का प्रस्ताव बनाकर नगर विभाग को भेजा गया, लेकिन विभाग से राशि नहीं मिली. नतीजा पुल अब भी उसी हाल में है.

पंचशील नगर में नाले में बहा व्यवसायी

15 सितंबर 2021 को पंचशील नगर पंडरा में व्यवसायी अजय प्रसाद अग्रवाल खुले नाले में गिर गये. परिजनों ने उन्हें बहुत ढूंढा, लेकिन बॉडी नहीं मिली. दो दिन बाद उनकी बॉडी कांके डैम में मिली. वहीं 20 जनवरी को कांटाटोली मौलाना आजाद कॉलोनी में नाले में गिरने से ढाई साल के बच्चे की मौत हो गयी. उसका बड़ा भाई भी नाले में गिरा था, जिसे लोगों ने बचा लिया. अब भी यह नाला उसी हाल में है.

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पूरे शहर में खुले नाले हादसे को दे रहे निमंत्रण

कांटाटोली, हिंदपीढ़ी, हरमू, डोरंडा, लोअर बाजार, धुर्वा, बरियातू और नामकुम इलाके में कई ऐसे नाले हैं, जहां बरसात में पानी भर जाने के कारण नाले और सड़क में फर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में इन खुले नालों में गिरने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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