रिम्स और सदर अस्पताल का ओपीडी हुआ बंद गंभीर मरीजों को ही मिला इमरजेंसी में प्रवेश

रिम्स ओपीडी में प्रतिदिन 1800 से 2000 मरीज विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने के लिए रिम्स आते हैं. उनके साथ परिजन भी रहते हैं, लेकिन सोमवार को रिम्स का नजारा बिल्कुल ही अलग था.

रांची : रिम्स ओपीडी में प्रतिदिन 1800 से 2000 मरीज विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने के लिए रिम्स आते हैं. उनके साथ परिजन भी रहते हैं, लेकिन सोमवार को रिम्स का नजारा बिल्कुल ही अलग था. इमरजेंसी के मुख्य द्वार का दरवाजा सटा कर रखा हुआ था. वैसे मरीजों को इमरजेंसी में जाने की अनुमति थी, जो गंभीर अवस्था में रिम्स पहुंच रहे थे.

सुरक्षाकर्मी सामान्य बीमारी का इलाज कराने आये लोगों को ओपीडी बंद होने का हवाला देकर लौटा दे रहे थे. हालांकि कोरोना हेल्प डेस्क पर मरीजों की भीड़ लगी थी. यहां सर्दी-खांसी व बुखार की समस्या लेकर आनेवाले मरीजों काे परामर्श दिया जा रहा था. बाहर से आनेवाले मरीजों पर ज्यादा सतर्कता बरती जा रही थी. वहीं, इमरजेंसी में दुर्घटना में घायल मरीजों का इलाज किया गया.

इधर, ओपीडी ब्लॉक का ताला लटका था. इमरजेंसी के सामने स्थित रिम्स फार्मेसी में भीड़ नहीं थी, क्योंकि यहां ओपीडी में परामर्श लेनेवाले मरीजों को ही दवा दी जाती है. कोरोना हेल्प डेस्क मेें परामर्श लेेनेवाले मरीजों को यहां से दवा दिया गया. भर्ती मरीज मेडाल में खून जांच कराने, सीटी स्कैन व एमआरआइ के लिए उपाधीक्षक कार्यालय से होते हुए गये.

इमरजेंसी से भर्ती हो रहे हैं मरीज : रिम्स में सामान्यत: 1350 से 1400 मरीज भर्ती रहते हैं, लेकिन वर्तमान में वार्ड में भर्ती मरीजों की संख्या बहुत कम हो गयी है. फिलहाल, रिम्स में 1100 मरीजों का इलाज किया जा रहा है. महत्वपूर्ण वार्ड न्यूरो सर्जरी, हड्डी, कार्डियोलॉजी आदि में मरीजों की संख्या है, लेकिन अन्य विभाग में मरीजों की संख्या पहले से कम हो गयी है. इमरजेंसी से ही मरीजों को भर्ती लिया जा रहा है. इसमें भी जिनको बहुत आवश्यक है, उसी को वार्ड में भर्ती किया जा रहा है. क्लिनिकल विभाग के विभागाध्यक्षों द्वारा पहले से ही आदेश जारी किया गया है कि मरीजों को फिलहाल भर्ती नहीं किया जाये.

सदर अस्पताल में भी ओपीडी बंद : सदर अस्पताल में भी सोमवार को ओपीडी सेवा बंद रहा. मरीजों का इलाज इमरजेंसी में किया गया. सदर अस्पताल में प्रतिदिन 800 मरीजों को परामर्श दिया जाता है, जो लोगों को नहीं मिला. ज्यादा आग्रह करने पर इमरजेंसी में कुछ मरीजों को परामर्श दिया गया. हालांंकि लेबर ओपीडी पूर्व की तरह चला, जिसमें गर्भवती महिला काे डॉक्टरों ने परामर्श दिया.

  • रिम्स ओपीडी में प्रतिदिन 1800 से 2000 मरीजों काे दिया जाता है परामर्श

  • सदर अस्पताल के अोपीडी में करीब 800 मरीजों को मिलता है परामर्श

ओपीडी सेवा बंद रही, जिससे भीड़ ज्यादा नहीं हुई. इमरजेंसी की सेवाएं चालू रहीं. गंभीर मरीजाें को कोई परेशानी नहीं हो इसकी पूरी व्यवस्था की गयी थी. इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर के अलावा कोरोना हेल्प डेस्क में डॉक्टर तैनात रहे.

डॉ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक रिम्स

ओपीडी बंद करने से अनावश्यक भीड़ नहीं लगी. इससे मास ट्रांसमिशन की संभावना कम रहती है. इमरजेंसी में सभी सेवाएं दी गयी. हम लोगों से भी अपील करते हैं कि जिनके मोहल्ला में विदेश या बाहर से लोग आये हैं उनको होम क्वारेंटाइन में रहने की सलाह दी जाये.

डॉ वीबी प्रसाद, सिविल सर्जन रांची

निजी अस्पतालों में भी ओपीडी बंद, इमरजेंसी परामर्श मिलेगा

रांची : कोरोना वायरस के स्थानीय स्तर पर फैलाव को रोकने के लिए आइएमए के अाह्वान पर निजी अस्पतालों में भी ओपीडी सेवा बंद कर दी गयी है. निजी अस्पताल प्रबंधन द्वारा रूटीन ओपीडी के बजाय इमरजेंसी परामर्श की सुविधा को शुरू किया गया है. अस्पताल के पूर्व के मरीजाें से सामान्य बीमारी व रूटीन परामर्श के लिए फोन पर संपर्क करने को कहा जा रहा है. राजधानी के बड़े व छोटे अस्पतालों ने इस व्यवस्था को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्णय लिया है. सोमवार को राज अस्पताल, आॅर्किड, सेवा सदन, गुरुनानक, मेडिका सहित अन्य निजी अस्पतालों में यह व्यवस्था लागू हो गयी. इमरजेंसी में ही मरीजों को परामर्श दिया गया.

इधर, निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से उनमें लगनेवाली भीड़ भी सीमित हो गयी. मरीज इमरजेंसी ओपीडी में आये और परामर्श लेकर घर लौट गये. इसके अलावा वैसे मरीजों को ऑपरेशन के लिए भर्ती नहीं किया जा रहा है, जिनको 10 दिन बाद भी ऑपरेशन किया जा सकता है. राज अस्पताल के संचालक योगेश गंभीर ने बताया कि रूटीन ओपीडी को इमरजेंसी ओपीडी मेें तब्दील कर दिया गया है. फोन पर रूटीन परामर्श दिया जा रहा है. डिस्ट्रिक्ट आइएमए के सचिव डॉ शंभु सिंह बताया कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए सभी निजी अस्पतालों व क्लिनिक से अपील की गयी है.

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Author: Pritish Sahay

Published by: Prabhat Khabar

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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