नहीं चेते, तो पानी रहने पर भी होगा जल संकट : नीतीश

Ranchi News : ऐसा नहीं है कि पानी बहुत होने से जल संकट नहीं होता है. समुद्र में काफी पानी है, लेकिन वह उपयोग के लायक नहीं है. समुद्री इलाकों में भी जल संकट होता है.

रांची. ऐसा नहीं है कि पानी बहुत होने से जल संकट नहीं होता है. समुद्र में काफी पानी है, लेकिन वह उपयोग के लायक नहीं है. समुद्री इलाकों में भी जल संकट होता है. रांची जैसे शहर में पानी रहते हुए भी जल संकट हो सकता है. ऐसा प्लानिंग स्तर पर ठोस रणनीति नहीं बनाने से हो रहा है. यह स्थिति आ रही है. इस मुद्दे को देखनेवालों को चाहिए कि वह जनता और विशेषज्ञों से बात कर समस्या दूर करने की पहल करें. ये बातें राजधानी के पर्यावरणविद् नीतीश प्रियदर्शी ने कहीं. वह शनिवार को राजधानी में क्लाइमेट कैफे : वाटर स्कारसिटी इन रांची विषय पर असर संस्था द्वारा आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे.

कांके डैम के किनारे 500 मीटर बोरिंग के बाद भी पानी नहीं

मौके पर श्री प्रियदर्शी ने कहा कि कांके डैम के किनारे 500 मीटर बोरिंग के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है. ऐसा डैम में गाद जमा हो जाने से हो रहा है. कांके डैम की वर्षों से सफाई नहीं हो सकी है. घरों में वाटर रिचार्ज बनाने की बाध्यता हो रही है. राजधानी के शहरों में कई ऐसे छोटे-छोटे घर हैं, जहां वाटर रिचार्ज प्वाइंट और सेप्टिक टैंक की दूरी काफी कम है. ऐसे में बोरिंग का पानी खराब हो जायेगा और पानी रहते हुए भी जल संकट हो जायेगा.

व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने की जरूरत

नैचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट एंड वाटर विषय के ज्ञाता कलोल साहा ने कहा कि पानी को बचाने के लिए आम नागरिकों को पहले व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने की जरूरत है. जब शहरी इलाकों में कंस्ट्रक्शन से पहले वाटर कंजर्वेशन और हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जायेगी, तभी वहां लोग बस पायेंगे. उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में उन फसलों की खेती पर जोर देना होगा, जिसमें पानी की खपत कम होती है.

पॉलिसी बनानेवालों को साथ में रखकर कोशिश हो

इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के अभिषेक आनंद ने कहा कि जब तक पॉलिसी बनानेवालों को साथ में रखकर काम नहीं किया जायेगा, तब तक बंद कमरे में बात करने का कोई फायदा नहीं. वेस्ट मिंस्टर यूनिवर्सिटी, यूके के रिसर्च स्कॉलर अरुणा पॉल ने कहा कि अगर अब भी सीएनटी-एसपीटी एक्ट को मजबूती से लागू किया जाये, तो आदिवासी जमीन और वहां के पानी को बचाया जा सकता है. इस अवसर पर श्रम विभाग की सलाहकार शिखा लकड़ा, पीडीएजी के मनुज पांडेय और असर संस्था के आकाश व ओमकार ने विचार व्यक्त किये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >