मगध जोन में माओवादी नेटवर्क दोबारा खड़ा करने की साजिश, NIA ने छठे आरोपी पर चार्जशीट दाखिल की

NIA Chargesheet: NIA ने CPI (माओवादी) के मगध जोन को फिर सक्रिय करने की साजिश मामले में छठे आरोपी चंदन कुमार के खिलाफ रांची की विशेष अदालत में पूरक चार्जशीट दाखिल की. जांच में लेवी वसूली, हथियारों के लिए फंड जुटाने और माओवादी नेटवर्क मजबूत करने के आरोप सामने आए.

NIA Chargesheet: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के मगध जोन को दोबारा सक्रिय करने और लेवी के जरिए संगठन के लिए फंड जुटाने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छठे आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. एजेंसी ने मंगलवार को रांची स्थित विशेष NIA अदालत में मामले की तीसरी पूरक चार्जशीट दाखिल करते हुए चंदन कुमार को आरोपी बनाया. NIA के अनुसार, चंदन कुमार पर ठेकेदारों से लेवी वसूलकर संगठन के लिए धन जुटाने, पुराने माओवादी कैडरों को फिर से सक्रिय करने और संगठन की गतिविधियों को मजबूती देने की साजिश में शामिल रहने का आरोप है.

2021 में दर्ज किया गया था मामला

NIA के मुताबिक, यह मामला दिसंबर 2021 में RC-05/2021/NIA/RNC के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज किया गया था. शुरुआती जांच में एजेंसी को ऐसे इनपुट मिले थे कि प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) बिहार-झारखंड क्षेत्र के मगध जोन में अपनी कमजोर पड़ चुकी पकड़ को फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है. इसी आधार पर विस्तृत जांच शुरू की गई थी. जांच के दौरान एजेंसी को कई ऐसे तथ्य मिले, जिनसे यह संकेत मिला कि संगठन अपने पुराने नेटवर्क को पुनर्जीवित करने और नए सिरे से आर्थिक संसाधन जुटाने की कोशिश कर रहा था. इसी क्रम में कई आरोपियों की भूमिका सामने आई और जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया.

मुंबई से हुई थी चंदन कुमार की गिरफ्तारी

NIA ने बताया कि चंदन कुमार को जनवरी 2026 में मुंबई से गिरफ्तार किया गया था. पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने दावा किया कि वह प्रतिबंधित संगठन के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था. जांच में यह भी सामने आया कि वह संगठन के निर्देशों के अनुरूप विभिन्न स्तरों पर संपर्क बनाए हुए था और फंड जुटाने की गतिविधियों में शामिल था. एजेंसी के अनुसार, पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसके खिलाफ तीसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की गई है.

पुराने कैडरों को जोड़ने की थी कोशिश

NIA का कहना है कि चंदन कुमार केवल धन जुटाने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह मगध जोन में संगठन की जमीनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा था. जांच में सामने आया कि वह पुराने माओवादी कैडरों को दोबारा संगठन से जोड़ने का प्रयास कर रहा था. साथ ही हिंसक गतिविधियों के माध्यम से माओवादी विचारधारा का विस्तार करने और संगठन की सक्रियता बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा था. एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य संगठन की कमजोर पड़ चुकी संरचना को फिर से खड़ा करना और प्रभावित क्षेत्रों में उसकी गतिविधियों को तेज करना था.

लेवी की रकम से हथियार खरीदने की साजिश

जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में यह भी सामने आया है कि विभिन्न ठेकेदारों से बड़ी मात्रा में लेवी वसूली गई थी. वसूली गई रकम को अलग-अलग माध्यमों से संगठन तक पहुंचाया गया, ताकि उसका उपयोग हथियार, गोला-बारूद और अन्य संसाधनों की खरीद में किया जा सके. NIA का दावा है कि इस धन का इस्तेमाल संगठन की परिचालन क्षमता बढ़ाने और माओवादी गतिविधियों को दोबारा गति देने के उद्देश्य से किया जाना था. एजेंसी इस वित्तीय नेटवर्क की भी गहराई से जांच कर रही है, ताकि धन के स्रोत और उसके उपयोग की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके.

कई आरोपी पहले से जांच के दायरे में

NIA के मुताबिक, इस मामले में CPI (माओवादी) के केंद्रीय संगठन से जुड़े प्रमुख स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) सदस्य प्रद्युम्न शर्मा, आरोपी अभिनव तथा एफआईआर में नामजद अन्य लोग भी इस कथित साजिश का हिस्सा हैं. एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका, आपसी संपर्क और आर्थिक लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है. अब तक इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और ताजा पूरक चार्जशीट के साथ चंदन कुमार का नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल हो गया है.

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जांच अभी जारी

NIA ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है. एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, वित्तीय लेन-देन, संपर्क सूत्रों और संगठन के पुनर्गठन की कथित साजिश के अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है. जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल मामला विशेष NIA अदालत में विचाराधीन है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी.

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Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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